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बिहार: दम तोड़ते मासूम, बिलखते परिजन… और नेताओं के गैर-जिम्मेदाराना बयान

मुजफ्फरपुर
बिहार के मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार कहे जाने वाले अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चलते हो रही मौतों से पूरे देश गम में है। अब तक 108 बच्चों की मौत हो चुकी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 3 हफ्ते बीत जाने के बाद मंगलवार को मुजफ्फरपुर जाने की सुध ली तो लोगों ने उनका जमकर विरोध किया। दूसरी ओर बिहार के सांसद और नीतीश कुमार के मंत्री मासूमों के मौत पर विवादित बयान दे रहे हैं। मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद और जेडीयू सांसद दिनेश चंद्र यादवने इन्सेफलाइटिस से हो रही मौतों की वजह गर्मी बताई वहीं राज्य की पूर्व सीएम राबड़ी देवी ने सीएम नीतीश पर निशाना साधा है।

सांसद के विवादित बोल- ‘4G’ से हुई बच्चों की मौत 
मुजफ्फरपुर में मौतों के बारे में जब यहां के सांसद अजय निषाद से सवाल किया तो उन्होंने बेहद लापरवाही से बयान देते हुए कहा, ‘इस बार ज्यादा मामले आ रहे हैं, इसकी वजह गर्मी भी है। गर्मी बहुत ज्यादा हो रही है, उसका रोकथाम करने के लिए पेड़-पौधे लगाना चाहिए। बीमारी की असली वजह 4 जी है, जी फॉर गर्मी, गांव, गरीबी और गंदगी। इससे बीमारी का ताल्लुक है। ज्यादातर मरीज गरीब तबके से हैं और उनके रहन-सहन के स्तर में गिरावट है। उसे सुधारने की जरूरत है।’

अस्‍पताल देरी से पहुंचे, इसलिए मौतें: मुख्य सचिव
इस बीच बिहार सरकार ने चमकी बुखार पर अपनी सफाई दी है। बिहार के मुख्‍य सचिव दीपक कुमार ने कहा कि मुजफ्फरपुर में अक्यूट इन्सेफलाइटिस सिंड्रोम से मौत के पीछे बच्‍चों का अस्‍पताल देरी से पहुंचना है। यह बार-बार कहा गया है कि अस्‍पतालों में आने वाले मरीजों को आने का खर्च नहीं देना होगा। उनका किराया वापस किया जाएगा। सभी को 400-400 रुपये किराया दिया जाएगा। सीएम नीतीश कुमार ने अपने दौरे के बाद बच्‍चों के बेहतर इलाज के लिए कई निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव ने यह भी दावा किया कि इस बीमारी से निपटने के लिए सभी उपाय पहले ही कर लिए गए थे।

अजय निषाद बोले- ज्यादातर मरीज अनुसूचित जाति के
अजय निषाद ने आगे कहा, ‘ज्यादातर मरीज गरीब परिवार से हैं, अनुसूचित जाति से हैं। गंदगी के कारण भी यह बीमारी हो रही है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘कभी-कभी चूक हो जाती है। बीमारी में गिरावट हो गई, इसलिए ध्यान हट गया।’

मुजफ्फरपुर के अस्पताल इस बीमारी के लिए तैयार ही नहीं थे। जबकि यह इलाका अकसर इस एईएस की चपेट में आता रहा है। एक-एक बेड पर 2-4 बच्चे भर्ती हैं और पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी 2-3 डॉक्टरों के कंधे पर है। ज्यादातर बच्चे बीमारी से कम और इलाज के अभाव में ज्यादा मरे हैं।

एईएस से बच्चों की मौत पर सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सरकार के खिलाफ गुस्सा है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री और बिहार के स्वास्थ्य मंत्रियों के दौरों के बाद भी बच्चों के मरने का सिलसिला नहीं रुका है। उधर जानलेवा बीमारी के चरम पर पहुंचने के 18 दिन बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुजफ्फरपुर का दौरा किया। अस्पताल में नीतीश के दौरे के दौरान बाहर लोगों ने जमकर विरोध किया और नीतीश वापस जाओ के नारे लगाए। बच्चों की मौत से बौखलाए परिजन नीतीश मुर्दाबाद और हाय-हाय के नारे लगाए।


बारिश के भरोसे सांसद

नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से सांसद दिनेश चंद्र यादव ने भी इन्सेफलाइटिस से मौतों पर बेहद गैर-जिम्मेदाराना बयान देते हुए कहा, ‘मुजफ्फरपुर की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई सालों से जब भी गर्मियां आती हैं, बच्चे बीमार पड़ जाते हैं और मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है। ऐसा हर बार होता है, सरकार ने व्यवस्था की है। जैसे ही बारिश शुरू होगी, यह रुक जाएगा।’ 

‘भारत-पाकिस्तान के मैच में देशभक्ति उमड़ती है’

इन्सेफलाइटिस पर मीटिंग के दौरान क्रिकेट स्कोर पूछने पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय की काफी आलोचना हुई। जबकि जेडीयू सांसद दिनेश चंद्र यादव उनके बचाव में नजर आए। उन्होंने कहा, ‘भारत-पाकिस्तान के मैच के दौरान लोगों के दिलों में देशभक्ति की भावना उमड़ती है। वे चाहते हैं कि भारत जीते। उन्होंने मीटिंग में सब कुछ गंभीरता से किया।’

“बीमारी की असली वजह 4 जी है, जी फॉर गर्मी, गांव, गरीबी और गंदगी। इससे बीमारी का ताल्लुक है। ज्यादातर मरीज गरीब तबके से हैं और उनके रहन-सहन के स्तर में गिरावट है।”-मुजफ्फरपुर के सांसद अजय निषाद

बिहार के मंत्री बोले- 200 को बचाया
इतना ही नहीं, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन भी सवालों से बचकर निकलते नजर आए। उन्होंने कहा, ‘मैं यहां कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस करने नहीं जा रहा हूं। मुझे जो कहना था कह दिया। रोज-रोज एक ही बात नहीं दोहराऊंगा। हमने राज्य सरकार को हरसंभव मदद का वादा किया। हम हर घंटे स्थिति का मुआयना कर रहे हैं।’ इससे पहले बिहार के मंत्री सुरेश शर्मा ने कहा था, ‘इन्सेफलाइटिस पर समीक्षा बैठक हो चुकी है। 200 बच्चों को बचाया जा चुका है और वे अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके है।’ सवालों से बचते हर्षवर्धन, दे

इधर, इस मामले में लोक जनशक्ति पार्टी के नेताओं के गायब रहने पर कांग्रेस पार्टी ने निशाना साधा है। कांग्रेस की राष्‍ट्रीय मीडिया समन्‍वयक राधिका खेरा ने एलजेपी नेता चिराग पासवान के गोवा में पार्टी करने की तस्‍वीरों के साथ उन पर निशाना साधा। राधिका खेरा ने ट्वीट किया, ‘यह हैं मौसम वैज्ञानिक रामविलास पासवान के चिराग। बिहार के जमुई से सांसद चिराग पासवान। हर घंटे मासूम मर रहे हैं और ममता बिलख रही है। पूरा सूबा सिसक रहा है, सैंकड़ों घरों के चिराग बुझ गए। एलजेपी को एक और मंत्रालय तो बनता है।’

अस्पताल के बाहर हुआ नीतीश का विरोध
लगातार मौतों के बावजूद भी मुजफ्फरपुर के लिए समय न निकालने पर बिहार के मुख्यमंत्री पर सवाल उठ रहे थे। इसके बाद मंगलवार को नीतीश कुमार ने मुजफ्फर का दौरा किया। अस्पताल में नीतीश के दौरे के दौरान बाहर लोगों ने जमकर विरोध किया और नीतीश वापस जाओ के नारे लगाए। बच्चों की मौत से बौखलाए परिजन नीतीश मुर्दाबाद और हाय-हाय के नारे लगाए। अस्पताल के बाहर खड़े लोगों का कहना है, ‘इलाज ठीक से नहीं हो रहा है, रोज बच्चे मर रहे हैं। नीतीश अब क्यों जागे हैं, उन्हें वापस चले जाना चाहिए।’

‘बच्चों का इलाज जरूरी या सीएम का आना’
नीतीश के मंत्री भी उनकी गैरमौजदूगी का जवाब नहीं दे पा रहे थे। सोमवार को पत्रकारों के सवाल के जवाब में बिहार सरकार में मंत्री श्याम रजक ने कहा था कि बीमार बच्चों को देखने के लिए सीएम नीतीश कुमार के यहां आने से अधिक जरूरी मरीजों का इलाज है और वह जारी है। रजक ने कहा था, ‘इस हालात पर सीएम की पूरी नजर बनी हुई है। आखिर महत्वपूर्ण क्या है, बच्चों का इलाज या फिर सीएम का यहां आना?’

राबड़ी ने कहा- मौत नहीं हत्या

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता राबड़ी देवी ने नीतीश कुमार और पीएम मोदी पर हमला बोलते हुए इसे मासूमों की हत्या करार दिया है। राबड़ी देवी ने ट्वीट कर कहा, ‘एनडीए सरकार की घोर लापरवाही, कुव्यवस्था, सीएम का महामारी को लेकर अनुत्तरदायी, असंवेदनशील और अमानवीय अप्रोच। लचर और भ्रष्ट व्यवस्था, स्वास्थ्य मंत्री के गैर-जिम्‍मेदाराना व्यवहार और भ्रष्ट आचरण के कारण गरीबों के 1000 से ज्‍यादा मासूम बच्चों की चमकी बुखार के बहाने हत्या की गई है।’