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उत्तराखंड: 12 बजे तक 29.38 प्रतिशत मतदान, वोटरों में खासा उत्‍साह, सीएम त्रिवेंद्र रावत समेत कई वीआइपी ने डाले वोट………..

सुबह नौ बजे तक देहरादून में 12, बागेश्वर में 10.97, कपकोट विधानसभा में 10.77 , पिथौरागढ़ में 9.6, श्रीनगर में 10, ऋषिकेश में 12, कोटद्वार में 5 .89, टिहरी में 9, चमोली में 5.43, चमोली के थराली में 8, कर्णप्रयाग विधानसभा में 11, पौड़ी जिले में 8.2 और रूद्रप्रयाग में 9 प्रतिशत मतदान हुआ है। बनबसा के 21 बूथों में 9 बजे तक 27.98 प्रतिशत मतदान हुआ. हरिद्वार ज़िले में 9 बजे तक कुल वोटिंग 9.05 प्रतिशत मतदान हुआ.

सुबह नौ बजे तक उत्तराखंड में 13.34 प्रतिशत मतदान हुआ है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने परिवार के साथ डीएवी पब्लिक स्कूल बूथ पर परिवार संग मतदान किया। परिवार संग विधायक हरबंस कपूर ने भी मतदान किया। एमएलए विनोद चमोली ने भी मतदान किया। टिहरी विधायक धन सिंह नेगी ने पालकोट और घनसाली विधायक शक्ति लाल शाह ने चांजी बूथ पर मतदान किया।

हरिद्वार में पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशांक ने देहरादून के बूथ पर अपना मतदान किया।

बनबसा में भजनपुर स्थित पोलिंग बूथ कमरा नंबर 1 और 2 में ईवीएम मशीन में आई खराबी के कारण 20 मिनट बाद मतदान शुरू हुआ। लालकुआं विधानसभा में सात ईवीएम मशीन और एक वीवीपैट खराब हुआ। जिन्हें बदल दिया गया है।

देहरादून, केदार दत्त। इसे पिछले डेढ़ दशक में चुनाव सुधारों को लेकर चली मुहिम का नतीजा कहें या फिर अपने कर्तव्य के निर्वह्न को लेकर संवेदनशीलता, बात चाहे जो भी हो, मगर 80 फीसद साक्षरता वाले उत्तराखंड में मताधिकार को लेकर मतदाताओं में जागरूकता बढ़ी है। लोकतंत्र के महापर्व में वे बढ़-चढ़कर आहुति देते आ रहे हैं और राज्य गठन के बाद 2004 से हुए लोकसभा चुनाव इसकी तस्दीक करते हैं। हर लोस सीट का बढ़ा मतदान प्रतिशत मतदाताओं की जागरूकता को दर्शाता है। मतदान के लिहाज से नैनीताल और हरिद्वार संसदीय क्षेत्र अव्वल हैं तो पर्वतीय क्षेत्र की सीटों पर भी उत्साह नजर आता है।

आप को ज्ञात हो कि उत्तराखंड बनने के बाद वर्ष 2004 से 2014 तक के तीन लोकसभा चुनावों को देखें तो यहां के मतदाताओं में बढ़ी जागरूकता का ग्राफ साफ नजर आता है। साथ ही यह दर्शाता है कि यहां के लोग लोकतंत्र में अपने वोट की अहमियत को समझते हैं और वे इस अधिकार का प्रयोग करने में पीछे नहीं हैं। आंकड़ों को ही देखें तो वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में राज्य में 48.74 फीसद लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया था, जो वर्ष 2014 में 61.67 फीसद पर आ गया। नैनीताल और हरिद्वार संसदीय क्षेत्रों के मतदाता भले ही वोट डालने को पोलिंग बूथ पर सबसे अधिक जाते हों, मगर पहाड़ की कंदराओं में उत्साह कम नहीं है। पर्वतीय स्वरूप वाली पौड़ी, टिहरी और अल्मोड़ा सीटों में भी गजब का उत्साह देखने में नजर आता रहा है। अब, गुरुवार को उत्तराखंडवासी फिर लोकतंत्र के महोत्सव में अपने मताधिकार के लिए तैयार हैं। माना जा रहा कि पिछले लोस चुनावों को देखते हुए इस मर्तबा भी यहां के लोग मतदान में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाकर अपनी जागरूकता का परिचय देंगे.

वोटर लिस्ट से गायब

देहरादून के देहराखास ब्लॉक 65 निवासी जतिन महाजन और उनके परिवार के सदस्यों के नाम वोटर लिस्ट से गायब है। जबकि उन्होंने निकाय चुनाव में मतदान किया था। स्मृति भसीन और उनके परिवार का नाम भी वोटर लिस्ट से गायब है। कुछ अन्य परिवारों के नाम भी वोटर लिस्ट से गायब बताए जा रहे हैं।