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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला : प्रताड़ना से ससुराल छोड़ने वाली महिला कहीं से भी दर्ज करा सकती है केस…………

कोर्ट ने धारा 498ए की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रताड़नाएं शामिल मानी जाएंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि क्रूर व्यवहार या प्रताड़ना के कारण ससुराल छोड़कर मायके आ गई या किसी और जगह शरण लेने वाली महिला जहां शरण लेती है वहीं पर आइपीसी की धारा 498ए (प्रताड़ना) का मुकदमा दर्ज करा सकती है। वहां की अदालत को उस मुकदमे को सुनने का क्षेत्राधिकार होगा। कोर्ट ने धारा 498ए की व्याख्या करते हुए कहा कि इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों प्रताड़नाएं शामिल मानी जाएंगी।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, एल. नागेश्वर राव और संजय किशन कौल की पीठ ने दो न्यायाधीशों की पीठों के विरोधाभासी फैसलों के चलते तीन न्यायाधीशों की पीठ को भेजे गए कानूनी सवाल का जवाब देते हुए यह अहम व्यवस्था दी है। रूपाली देवी बनाम उत्तर प्रदेश के इस मामले में कोर्ट ने धारा 498ए की व्याख्या करते हुए उसमें दिए गए क्रूरता के व्यवहार का विश्लेषण किया है। कोर्ट ने कहा है कि क्रूरता शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की हो सकती है।

कोर्ट ने कहा कि 498ए में दी गई क्रूरता की परिभाषा के मद्देनजर ससुराल द्वारा सताई गई महिला के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पति या रिश्तेदारों की क्रूरता के कारण पत्नी का मानसिक तनाव मायके आने के बाद भी कायम रहता है। शारीरिक प्रताड़ना के कारण मिली मानसिक प्रताड़ना, बेइज्जती, गंदी बातें, लड़ाई झगड़े का असर मायके आने के बाद भी महिला पर बना रहता है जबकि वहां उसे शारीरिक प्रताड़ना नहीं मिलती। ऐसे में यह एक अलग अपराध है जो उसके मायके या जहां वह शरण लेती है वहां तक जारी रहता है। यह अपराध धारा 498ए के तहत क्रूरता माना जाएगा।