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नवरात्र विशेष: अगर आपको डायबिटीज या ब्लड प्रेशर है तो उपवास के दौरान बरते ये सावधानियां………….

संस्कृत भाषा के शब्द नवरात्र का अर्थ होता है- नौ रातें। इन नौ रातों के दौरान देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। इसलिए नवरात्र में बड़ी संख्या में लोग उपवास रखते हैं। अधिकांश धर्म उपवास को शुद्धिकरण या तपस्या का जरिया मानते हैं। इसलिए इसे बहुत महत्व देते हैं। धार्मिक एवं आध्यात्मिक संदर्भ में भोजन शरीर को पोषण प्रदान करता है और उपवास आत्मा को पोषण (शक्ति) प्रदान करता है। नवरात्र में प्राय: 8 से 9 दिनों तक उपवास रखने की परंपरा है। ऐसा देखा गया है कि लोग उपवास अलग-अलग तरीके से रखते हैं।

उदाहरण के तौर पर कुछ लोग इस दौरान दिन में एक बार भोजन करते हैं ,तो कुछ लोग दिन में दो बार। एक ओर कुछ लोग इस दौरान नमक नहीं खाते तो दूसरी ओर लोग इस दौरान तला हुआ भोजन करते हैं। उपवास का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा, वह बात इसे रखने के तरीके पर निर्भर करती है। नवरात्र (6 अप्रैल से शुरू) में धार्मिक दृष्टि से उपवास का विशेष महत्व है, लेकिन जो लोग डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, उन्हें उपवास रखते समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है। टाइप-1 डायबिटीज के साथ जी रहे लोग और जिन लोगों की ब्लड शुगर अनियंत्रित है, वे व्रत न रखें…

उपवास का प्रभाव

भारतीय धर्म-संस्कृति में यह मान्यता है कि धार्मिक साधना के साथ उपवास हमारे शारीरिक और मानसिक संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। उपवास रखने का निर्णय व्यक्तिगत है, लेकिन डायबिटीज (मधुमेह) से ग्रस्त व्यक्तियों को उपवास का निर्णय धार्मिक दिशा-निर्देशों में दी गई छूट को ध्यान में रखकर और उपवास से जुड़ी स्वास्थ्य से संबंधित जटिलताओं को ध्यान में रखते हुए ही लेना चाहिए, क्योंकि ऐसे लोगों में उपवास के दौरान कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। जैसे…

ब्लड शुगर का कम होना

जब डायबिटीज से ग्रस्त व्यक्ति नवरात्र में उपवास करते हैं, तो उन्हें आम दिनों की तुलना में कई घंटों तक खाली पेट रहना पड़ता है। इस वजह से उनके खून में ग्लूकोज की मात्रा कम हो सकती है, जिसे हाइपोग्लाइसीमिया कहते हैं। यह स्थिति खतरनाक साबित हो सकती है। रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) कम होने के लक्षण आसानी से पहचाने जा सकते हैं। आमतौर पर 70 या इससे कम ब्लड शुगर आने पर कुछ लक्षण महसूस होने लगते हैं। जैसे- अचानक पसीना आना, शरीर में कमजोरी या कंपन होना, दिल की धड़कनें तेज होना आदि।

ऐसे करें नियंत्रित

हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति में शहद, चीनी, ग्लूकोज लेकर ब्लड शुगर में आई कमी को दूर किया जा सकता है। हाइपोग्लाइसीमिया की स्थिति से बचने के लिए नियमित रूप से अपनी ब्लड शुगर के स्तर को नापते रहना अनिवार्य है।

ब्लड शुगर में वृद्धि

नवरात्र के उपवास के दौरान कुछ लोगों में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में  हाइपरग्लाइसीमिया कहते हैं। हाइपरग्लाइसीमिया का मुख्य कारण कार्बोहाइड्रेट और वसायुक्त खाद्य पदार्थों जैसे तली हुई पकौड़ियों का सेवन, आलू और साबूदाना आदि का सेवन अधिक मात्रा में करना या फिर दवाओं को सही मात्रा या समय पर न लेना है। इसलिए इस दौरान नियमित रूप से ब्लड शुगर की जांच करना और उसे नियंत्रण में रखने का यथासंभव प्रयास करना अनिवार्य है।