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देश के पहले लोकपाल प्रमुख जस्टिस बने पिनाकी घोष, राष्‍ट्रपति कोविंद ने दिलाई शपथ…………

भारतीय लोकतंत्र में आज एक नया अध्‍याय जुड़ गया है। जस्टिस पिनाकी घोष ने शनिवार को देश के पहले लोकपाल की शपथ ग्रहण की। राष्‍ट्रपति भवन में राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पिनाकी घोष को संविधान की रक्षा की शपथ दिलाई।

इस अवसर पर उपस्थित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्‍हें बधाई दी। इस औपचारिक कार्यक्रम के दौरान राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद, उपराष्‍ट्रपति वैंकैया नायडू, मुख्‍य न्‍यायाधीश रंजन गोगोई भी उपस्थि‍त थे।

बता दें कि इसी हफ्ते राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पिनाकी चंद्र घोष को देश का पहला लोकपाल नियुक्त किया था। आधिकारिक आदेश के मुताबिक, सशस्त्र सीमाबल (एसएसबी) की पूर्व प्रमुख अर्चना रामसुंदरम, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव दिनेश कुमार जैन, महेंद्र सिंह और इंद्रजीत प्रसाद गौतम को लोकपाल के गैर न्यायिक सदस्य नियुक्त किया गया है। वहीं जस्टिस दिलीप बी भोंसले, प्रदीप कुमार मोहंती, अभिलाषा कुमारी और अजय कुमार त्रिपाठी को लोकपाल के न्यायिक सदस्य के तौर पर नियुक्त किया गया है।

पहली बार 1967 में उठा था मुद्दा

विदेश में लोकपाल जैसी संस्था काफी साल पहले से है, लेकिन भारत में इसका प्रवेश साल 1967 में हुआ. उस वक्त पहली बार भारतीय प्रशासनिक सुधार आयोग ने भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों को लेकर लोकपाल संस्था की स्थापना का विचार रखा था. हालांकि इसे स्वीकार नहीं किया गया था.

अन्ना ने लड़ी थी बड़ी लड़ाई

इस बिल को लेकर समाजसेवी अन्ना हजारे ने एक अनशन किया और वो एक बड़ी लड़ाई में तब्दील हो गई. उसके बाद लोकसभा ने 27 दिसंबर, 2011 को लोकपाल विधेयक पास किया, फिर 23 नवंबर 2012 को प्रवर समिति को भेजने का फैसला किया. उसके बाद 17 दिसंबर 2013 को राज्यसभा में लोकसभा विधेयक पारित हुआ.