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पुलवामा हमलाः CRPF की उसी बस में सवार था ये जवान, एक मैसेज से बच गई जान

थाका बेलकर (फाइल फोटो)

पिछले हफ्ते हुए पुलवामा आतंकी हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए, लेकिन एक जवान ऐसा भी है जो अपनी बटालियन में शामिल अपने साथियों के साथ कश्मीर के लिए रवाना होने जा रहा था, लेकिन गाड़ी पर बैठने के बाद उनके मोबाइल पर एक मैसेज आया जिसे पढ़कर वह गाड़ी से उतर गया जिससे उनकी जान बच गई.

महाराष्ट्र के अहमदनगर के थाका बेलकर सीआरपीएफ के उसी बटालियन में थे जिस पर 14 फरवरी को पुलवामा में आतंकियों ने हमला किया जिसमें 40 जवान शहीद हो गए. हमले के दिन पुलवामा से बहुत दूर अहमदनगर स्थित थाका बेलकर के घर में उनकी शादी की तैयारियां चल रही थी, लेकिन उन्हें शादी के लिए हेडक्वार्टर से छुट्टी नहीं मिली और उनको भी उसी वक्त बटालियन के साथ कश्मीर जाने को कहा गया. इस आदेश के बाद थाका बेलकर अपने साथियों के साथ कश्मीर जाने की तैयारी में जुट गए.

वह अपनी बटालियन के साथ निकलने की तैयारी कर ही रहे थे कि तभी उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि ‘आपकी छुट्टी मंजूर कर ली गई है’, यह मैसेज पढ़ते ही बेलकर गाड़ी से उतरकर अपने कैंप से गांव के लिए निकलने की तैयारी करने के लिए उतर गए और उनकी जान बच गई.

अहमदनगर के पारनेर जिले का एक अकाल पीड़ित गांव है जहां थाका बेलकर का घर है. बेलकर के परिवार में माता-पिता और एक छोटी बहन है. बेलकर के घर उनकी शादी की तैयारियां जोर-शोर से चल रही थी. सभी शादी की तैयारियों में लगे थे. अगर उस वक्त बेलकर को छुट्टी नहीं मिली होती तो उन्हें भी बटालियन के साथ जाना पडता. शादी के लिए छुट्टी अप्लाई करने के बाद बेलकर को अपनी छुट्टी की मंजूरी मिलने का इंतजार का कर रहे थे, लेकिन 13 फरवरी तक उन्हें छुट्टी का कोई मैसेज नहीं आया था. दूसरी तरफ बटालियन को यहां से कश्मीर जाने का ऑडर भी मिला गया था. बटालियन में सभी कश्मीर जाने के लिए अपना-अपना सामान पैक कर रहे थे. लेकिन 14 की सुबह बेलकर अपने बाकी साथियों के साथ गाड़ी में बैठे ही थे कि तभी उनके मोबाइल पर मैसेज आ गया था और गाड़ी से उतर गए और उनकी जिंदगी बच गई.

गाड़ी से उतरकर बेलकर अपने कैंप में वापस आ गए और अपने गांव के लिए निकल पडे. लेकिन रास्ते में कुछ ही घंटे बाद उन्हें पता चला कि जिस गाड़ी से बेलकर बटालियन के साथ कश्मीर के लिए निकलने वाले थे उसी गाड़ी पर आतंकी हमला हो गया और इस हमले में 40 जवान शहीद हो गए. बेलकर अगली सुबह अपने गांव पहुंच गए, लेकिन उन्हें अपने 40 साथियों की मौत का गहरा सदमा है. उन्होंने मीडिया के सामने आकर कुछ भी कहने से मना कर दिया. बेलकर के परिवार को भी इस घटना से सदमा पहुंचा. शादी का जश्न मातम में बदल गया.