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पाकिस्तान में आतंकियों को मिले पनाह का मुद्दा सउदी प्रिंस के सामने आज उठाएगा भारत

पाकिस्तान में आतंकियों को मिले पनाह का मुद्दा सउदी प्रिंस के सामने आज उठाएगा भारत

सउदी अरब और पाकिस्तान की तरफ से सोमवार को जारी संयुक्त बयान में जिस तरह से कुछ चुभने वाले मुद्दों को उठाया गया है उसे देखते हुए अब सभी की नजर भारत व सउदी अरब की तरफ से बुधवार को जारी होने वाले संयुक्त बयान पर है। सउदी अरब के भावी शासक प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान मंगलवार को देर रात नई दिल्ली पहुंचे और पीएम नरेंद्र मोदी ने हवाई अड्डे पर उनकी आगवानी की।

बुधवार को सउदी प्रिंस और पीएम नरेंद्र मोदी की द्विपक्षीय आधिकारिक वार्ता है। भारत की पूरी कोशिश होगी कि संयुक्त बयान में पाकिस्तान में तमाम आतंकी संगठनों को मिल रहे पनाह के मुद्दे पर उसकी संवेदनशीलता को ना सिर्फ सउदी अरब समझे बल्कि उसे संयुक्त बयान में उचित स्थान भी मिले।

प्रिंस सलमान सोमवार को पाकिस्तान में थे और वहां उनकी पीएम इमरान खान के साथ हुई वार्ता के बाद जारी बयान में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध लगाने संबंधी प्रावधानों का राजनीतिक इस्तेमाल किसी को नहीं करना चाहिए। यह सीधे तौर पर जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर भारत की तरफ से संयुक्त राष्ट्र का प्रतिबंध लगाने की चल रही कोशिशों की तरफ इशारा करता है। माना जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से खास आग्रह करने पर संयुक्त बयान में शामिल किया गया है।

सूत्रों का कहना है कि बुधवार को भारत-सउदी अरब की तरफ से जारी होने वाला संयुक्त बयान आतंकवाद को लेकर वर्ष 2016 में इन दोनों देशों की तरफ से जारी बयान से ज्यादा कठोर होगा। तब के बयान में ‘सीमा पार आतंकवाद’ जैसे शब्द इस्तेमाल नहीं किये गये थे लेकिन इसमें कहा गया था कि किसी भी देश को किसी दूसरे देश में दहशत फैलाने वाले आतंकियों को पनाह नहीं देनी चाहिए।

मोदी और प्रिंस सलमान के बीच इस मुलाकात से भारत व सउदी अरब के बीच मौजूदा ऊर्जा सहयोग की तस्वीर में भी भारी बदलाव आएगा। अभी दोनो देशों में खरीददार व विक्रेता का रिश्ता है। सउदी तेल व गैस बेचता है और भारत खरीदता है, लेकिन आने वाले दिनों में सउदी भारत के ऊर्जा सेक्टर में एक बड़ा निवेशक भी बनने जा रहा है और भारत सौर ऊर्जा के क्षेत्र में उसका एक बड़ा साझेदार देश बनेगा। इस बारे में दोनो देशों के बीच एक अहम समझौते पर भी हस्ताक्षर होगा।सउदी अरब की भारत के पश्चिमी तट पर बनने वाली 44 अरब डॉलर की निवेश योजना में आधी हिस्सेदारी खरीदेगी। दोनो देशों के बीच च्च्चे तेल का रणनीतिक भंडारण क्षमता बनाने में भी सहयोग स्थापित होने जा रहा है।