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परीक्षा में दिग्गज भी हुए फेल, नहीं दे पा रहे सटीक जवाब

परीक्षा में दिग्गज भी हुए फेल, नहीं दे पा रहे सटीक जवाब, प्रियंका ने कहा- होमवर्क करें

उत्तर प्रदेश कांग्रेस को नए सिरे से संवारने में जुटी प्रियंका गांधी उस समय हैरत में पड़ गई जब अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी अपनी बूथ संख्या और क्षेत्र में मतदान केंद्रों की गिनती भी नहीं बता सके। प्रियंका ने अपने नेताओं की परीक्षा लेने के साथ उन्हें एकजुट होकर चुनाव लड़ने और कांग्रेस की नीतियों के प्रचार का मंत्र दिया।

लोकसभा क्षेत्रवार प्रमुख नेताओं से मिलते हुए प्रियंका उनके मन की सुनने के साथ ही कुछ सवाल भी पूछ रही हैं। बूथ संख्या को जानने के बाद स्थानीय समस्याएं व जातीय समीकरणों के साथ पिछले चुनाव में कांग्रेस की स्थिति के बारे में पूछताछ भी करती हैं। लखनऊ के एक बड़े नेता जब अपने बूथ के बारे में ठीक से जानकारी नहीं दे पाए तो प्रियंका ने होमवर्क ठीक करने की हिदायत दी। बैठक की शुरुआत नमस्कार व हालचाल लेने से होती है। बहुत सहज भाव में प्रियंका यह अहसास कराती हैं कि वह नेता नहीं परिवार की सदस्य हैं। कानपुर के चंदन का कहना था कि प्रियंका से मिलकर नहीं लगा कि इतनी बड़ी नेता से मिल रहे हैं।

उन्नाव के नेताओं से उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि कांग्रेस शासन में जो फैक्ट्री आदि लगी, उनका क्या हाल है? उन्नाव के एक नेता मतदान केंद्रों की संख्या नहीं बता सके। प्रियंका पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा क्षेत्रीय विकास के लिए किए गए कार्यो को पूछना भी नहीं भूलतीं। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि ने क्या किया और कहां वह असफल रहे, यह भी बैठक का अहम मुद्दा रहा। प्रियंका से बात कर निकले नेताओं का कहना था कि वह हर कार्यकर्ता से ऐसे बात कर रही हैं जैसे उसे अच्छी तरह जानती हों।

देर रात तक चली बैठकों में मोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, अमेठी, उन्नाव व कौशांबी के कार्यकर्ताओं से चर्चा हुई। प्रियंका अहम सुझावों को नोट भी करती हैं और पार्टी प्रत्याशी तय होने पर एकजुट होकर जितवाने का संकल्प भी दिलवाती हैं।सोमवार को सफल रोड शो से कांग्रेसजन में जगा उत्साह मंगलवार को भी नजर आ रहा था क्योंकि अब प्रियंका से मिलने की बारी थी। प्रियंका दोपहर लगभग एक बजे जयपुर से लखनऊ पहुंचीं। कांग्रेस दफ्तर में मेले जैसा माहौल रहा। प्रियंका के पहुंचते ही आसपास का इलाका जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। कार्यालय में घुसने को आपाधापी मची रही, जिसके चलते कई बार हाथापाई की नौबत भी आई। कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को हस्तक्षेप करना पड़ा।