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स्मार्ट सिटी रैकिंग में लखनऊ पांचवे पायदान पर

स्मार्ट सिटी रैकिंग में लखनऊ पांचवे पायदान पर, झांसी और वाराणसी से भी‍ पिछड़ा

स्मार्ट सिटी में लखनऊ की स्थिति यूपी के अन्य शहरों से भी खराब हो गई है। राजधानी होने के बाद भी झांसी, वाराणसी, कानपुर व आगरा से भी पीछे लखनऊ है। ओवर ऑल परफार्मेंस में लखनऊ 98 शहरों में 40वें नंबर पर आया है। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी सूची में नागपुर को 360.21 नंबर मिले हैं। वहीं यूपी में झांसी 181.74 नंबर लेकर टॉप पर बना हुआ है, जबकि लखनऊ 72.26 अंक लेकर 40वें नंबर पर है। राजधानी को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से समय समय पर बजट जारी होता रहा, लेकिन जिम्मेदार इनका उपयोग नहीं कर सके।

इसको लेकर भारत सरकार से आए स्मार्ट सिटी के हेड कुनाल कुमार ने नगर आयुक्त व स्मार्ट सिटी के सीईओ इंद्रमणि त्रिपाठी से स्मार्ट सिटी को लेकर कई सवाल किए। पिछले तीन सालों में राजधानी लखनऊ में एक ऐसा स्मार्ट सिटी का टेंडर नहीं हो सका और न हीं कोई ऐसा काम हुआ, जिसको बताया जा सके। शुक्रवार को स्थानीय निकाय निदेशालय में चली बैठक में स्मार्ट सिटी से जुड़े अफसर को भी आपसी तालमेल बेहतर न होने के कारण सुनना पड़ा। वहीं सीईओ इंद्र मणि ने बताया कैसरबाग क्षेत्र में शेल्टर होम और वाटर लाइन का टेंडर फरवरी में आवंटित कर दिया जाएगा। क्योंकि मार्च के पहले सप्ताह में आचार संहिता का संशय है। स्मार्ट सिटी के खाते में 374 करोड़ रुपये है, बजट की कोई कमी नहीं है, सात फरवरी को यूपी के बजट में सौ करोड़ और केंद्र से भी इतनी राशि मिलनी है। कुल मिलाकर 544 करोड़ हो जाएंगे लेकिन स्मार्ट सिटी विंग छोटे मोटे काम करके स्मार्ट सिटी का ढिंढोरा पीट रहे हैं। वास्तव में कैसरबाग के 813 एकड़ के उस क्षेत्र पर कोई काम ही नहीं किया गया, जहां होना था। सीईओ कहते हैं कि इसके पीछे विभागों में आपसी तालमेल भी एक बड़ा कारण है, जिससे लखनऊ पीछे है। आवास एवं शहरी विकास मंत्रालय ने 98 शहरों के बीच रेटिंग की। रेटिंग के दौरान वैल्यू ऑफ टेंडर इश्यू, वैल्यू ऑफ वर्क आर्डर, वैल्यू ऑफ वर्क कंपलीट और वैल्यू ऑफ यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट को देखते हुए सूची बनाई। इसमें लखनऊ इन सभी कामों को करने के मामले में 40वें नंबर पर रहा।