होम

चीन इन हथियारों के दम पर अमरीका को छोड़ सकता है पीछे

बीजिंग में मिलिट्री परेड

अपने आंतरिक गतिरोध और पड़ोसी देशों के साथ वक़्त-वक़्त पर पैदा होने वाले तनाव के चलते यह देश 1990 की शुरुआत से अपनी सेना (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के आधुनिकीकरण में लगा हुआ है.

राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने अपनी सेना पर बहुत अधिक निवेश किया है और आज यह दुनिया की सबसे मजबूत सैन्य ताकत बनने की ओर तेज़ी से अग्रसर है.

अमरीकी रक्षा विभाग की खुफ़िया एजेंसी की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक़, ”चीन के आर्थिक विकास में कुछ गिरावट देखने को मिली है, लेकिन इसने अपनी सेना के आधुनिकीकरकण के लिए पांच वर्षीय योजना के तहत बहुत अधिक निवेश किया है.”

”अपनी सेना को अलग-अलग मोर्चों पर मजबूत बनाने के लिए चीन ने कई तरह के आधुनिक हथियारों को अपने बेड़े में शामिल किया है. कुछ मामलों में तो चीन ने अच्छी-खासी बढ़त पहले ही हासिल कर ली है.”

पिछले साल दिसंबर में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की गई. इन तस्वीरों के साथ यह बताया गया कि चीन की नौसेना के पास युद्ध में इस्तेमाल होने वाला सबसे आधुनिक हथियार है. इसके ज़रिए हाइपरसॉनिक स्पीड से हमले किए जा सकते हैं.

पानी के जहाज़ पर तैनात इस आधुनिक रेलगन के ज़रिए 2.5 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ़्तार से 200 किलोमीटर तक की दूरी के लक्ष्य को निशाना बनाया जा सकता है.

सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार यह हथियार साल 2025 तक युद्ध के मैदान में मोर्चा संभालने के लिए तैयार हो जाएगा.

वैसे तो अमरीका भी अपनी सरज़मीन पर रेलगन बनाने का काम कर रहा है. इसके अलावा रूस और ईरान भी इस तकनीक के प्रति इच्छुक हैं. लेकिन इन तमाम देशों से पहले चीन ने अपनी नौसेना को मजबूती देने में बढ़त हासिल कर ली है.

हालांकि बीबीसी ने सोशल मीडिया पर जारी की गई तस्वीरों की स्वतंत्र रूप से जांच नहीं की है लेकिन इन तस्वीरों में दिखता है कि चीन ने समुद्र में इन हथियारों का परीक्षण कर लिया है.

चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, माना जा रहा है कि यह हथियार चीन के पहले घरेलू रूप से निर्मित विध्वंसक हथियार 055 की जगह ले सकता है.

पीएलके के पूर्व सदस्य और चीनी सेना के विशेषज्ञ सोंग झोंगपिंग ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट को इस संबंध में बताया, ”चीन ने अमरीका की इलेक्ट्रोमैगनेटिक तकनीक को पछाड़ने के लिए हरसंभव कोशिश की है.”

”सोशल मीडिया पर लीक हुई तस्वीरों से पता चलता है कि चीन ने अमरीका को जहाज़ पर तैनात होने वाली रेल गन तकनीक में भी पछाड़ने की कोशिश कर रहा है. शायद वह आने वाले पांच से दस सालों में ऐसा करने में कामयाब हो भी जाए. इसकी एक बड़ी वजह यह है कि अमरीका में सैन्य बजट पारित करवाने में लंबा वक़्त लगता है जबकि चीन का राजनीतिक सिस्टम इसके बिल्कुल उलट है.”

अगस्त 2018 में चीन ने एक हाइपरसॉनिक एयरक्राफ़्ट के परीक्षण की बात कही थी. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के शब्दों में कहें तो यह एयरक्राफ़्ट किसी भी तरह के मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम को तोड़ने में कारगर है.

वेवराइडर एक ऐसा एयरक्राफ़्ट है जो वायुमंडल में उड़ते समय शॉकवेव का इस्तेमाल करता है. ये शॉकवेव तब उत्पन्न होती हैं जब एयरक्राफ़्ट ऊंचाई पर पहुंचकर तेज़ गति से उड़ान भरता है.

परीक्षण के दौरान चीनी वेवराइडर जिसका नाम शिनकोंग-2 (स्टारी स्काई-2) है, 30 किमी की ऊंचाई पर पहुंचा और उस समय उसकी गति 7.3444 किमी प्रति घंटा थी.

स्टारी स्काई-2 चीन का पहला हाइपरसॉनिक एयरक्राफ़्ट नहीं है. इसका उपयोग हाइपरसॉनिक ग्लाइड वाहनों के परीक्षण के लिए साल 2014 से किया जा रहा है, यही वजह है कि वेवराइडर तकनीक के परीक्षण में भी इसका प्रयोग किया गया.

रूस और चीन भी हाइपरसॉनिक हथियारों के निर्माण पर काम कर रहे हैं.

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, ”पूर्णरूप से विकसित वेवराइडर युद्ध के दौरान किसी भी तरह के एंटी-मिसाइल डिफ़ेंस सिस्टम को भेदने में कामयाब रहते हैं.”

हालांकि बीजिंग में मौजूद एक सैन्य विशेषज्ञ झोऊ चेन्मिंग के अनुसार चीन के वेवराइडर न्यूक्लिकर हथियारों की बजाय सिर्फ पारंपरिक युद्धक सामग्री को ही ले जा सकते हैं.

उनका मानना है कि अभी भी इस तकनीक पूरी तरह से विकसित होने में तीन से पांच साल ज़रूर लगेंगे.