देश राजनीती होम

प्रियंका गांधी के राजनीति के अखाड़े में उतरते ही कांग्रेस ने तैयार किया ‘मिशन 30’ का फॉर्मूला

प्रियंका गांधी के राजनीति के अखाड़े में उतरते ही कांग्रेस ने तैयार किया 'मिशन 30' का फॉर्मूला

अगले लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश में बहुजन समाजवादी पार्टी (BSP) और समाजवादी पार्टी (SP) ने गठबंधन करके कांग्रेस को ठेंगा दिखा दिया है. ऐसे में कांग्रेस ने प्रदेश की सभी 80 सीटों पर इन दोनों दलों को करारा जवाब देने का मन बना लिया है.

इस गठबंधन के बाद कांग्रेस के खेमे में ठोस रणनीति बनाने के लिए लगातार बैठकों को दौर चल रहा है. इसके लिए कांग्रेस ने ‘मिशन 30’ का फॉर्मूला तैयार किया है. ‘मिशन 30’ यानी वो सीटें जहां कांग्रेस को पिछली बार 2014 के चुनाव में एक लाख से ज़्यादा या फिर उसके करीब वोट मिले थे.

हालांकि, कांग्रेस के लिए ये कदम जोखिम भरा साबित हो सकता है. दरअसल ये वो सीटें हैं जहां अगर सभी दलों के बीच वोटों का बंटवारा होता है, तो फिर इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है. उदाहरण के तौर पर साल 2014 में सहारनपुर की सीट पर कांग्रेस के इमरान मसूद 4 लाख वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे. बीजेपी के उम्मीदवार को यहां 4.77 लाख वोट से जीत मिली थी. जबकि, BSP और SP को सिर्फ 3 लाख वोट मिले थे. ऐसे में अगर कांग्रेस अकेली लड़ती है, तो फिर इसका फायदा बीजेपी को मिल सकता है.

हालांकि, सच्चाई ये भी है कि राजनीति सिर्फ कागज पर बनी संभावनाओं से नहीं लड़ी जाती है. जमीनी हकीकत ये है कि समकीरण बदलने में देर नहीं लगती है; और वो भी तब जबकि कांग्रेस ने राजनीति के अखाड़े में ट्रंप कार्ड के तौर पर प्रियंका गांधी को उतार दिया है.

47 साल की प्रियंका गांधी को योगी आदित्यनाथ के खिलाफ पूर्वी उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है. यहां उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी चुनावी मैदान में मुकाबला करना होगा. इसके अलावा मैदान में पहले से ही बुआ-भतीजा की जोड़ी तो है ही.

कांग्रेस के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि ‘मिशन 30’ हमारी रणनीति का हिस्सा है, लेकिन पार्टी की नजर सभी 80 सीटों पर रहेगी. साल 2009 के चुनाव में जिन 21 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी वो सभी ‘मिशन 30’ में आती है. ‘मिशन 30’ की सीटें पूरे प्रदेश में हैं. पश्चिम सहारनपुर, गाज़ियाबाद और रामपुर की सीटें भी इसी में शामिल है.

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि पिछली बार 2014 के चुनाव में कांग्रेस को RLD के साथ हुए गठबंधन से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फायदा मिला था. लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा. अजीत सिंह महागठबंधन में शामिल है, लेकिन उन्हें कितनी सीटें दी जा रही है, इसको लेकर भी तस्वीर साफ नहीं है.

पश्चिम उत्तर प्रदेश के इलाकों में जाट वोटों का दबदबा है. पिछली बार यहां के कुछ सीटों पर कांग्रेस को 20 हजार से कम वोट मिले थे. इससे साफ है कि जाट के वोट पारंपरिक तौर पर RLD को नहीं गए. इन सब में से कई लोगों ने बीजेपी पर विश्वास जताया. सहारनपुर, गाजियाबाद और रामपुर में कांग्रेस को इसलिए फायदा मिला क्योंकि यहां से उनके बड़े नेता खड़े हुए थे.