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नाकाम नहीं हुई है कॉलेजियम व्यवस्था, किसी तरह का भाई भतीजावाद नहीं : जस्टिस लोकुर

जस्टिस मदन बी लोकुर

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस (सेवानिवृत्त) एम बी लोकुर हालिया कॉलेजियम विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दी है। जस्टिस लोकुर ने कहा कि कॉलेजियम व्यवस्था नाकाम नहीं हुई है और यहां किसी तरह का भाई भतीजावाद नहीं है। बता दें कि हाल ही में कॉलेजियम ने दो हाईकोर्ट जजों को प्रमोट करने का फैसला बदल दिया था। कॉलेजियम ने इनकी जगह दूसरे दो जजों को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की थी। इसे लेकर खासा विवाद हुआ था। जस्टिस एम बी लोकुर ने आगे कहा कि मैं निराश हूं कि शीर्ष अदालत के कॉलेजियम का 12 दिसंबर का फैसला वेबसाइट पर नहीं डाला गया। न्यायमूर्ति लोकुर ने न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग, राजेंद्र मेनन को पदोन्नत नहीं किये जाने पर कहा, कॉलेजियम में जो होता है वह गोपनीय है और विश्वास महत्वपूर्ण है।

लोकुर ने न्यायमूर्ति नंदराजोग और मेनन को शीर्ष अदालत में पदोन्नत नहीं किये जाने पर कहा, मुझे नहीं पता कि मेरी सेवानिवृत्ति के बाद कौन से अतिरिक्त दस्तावेज आए। भाई भतीजावाद के दावों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि कॉलेजियम व्यवस्था नाकाम हो गई है। कॉलेजियम में स्वस्थ चर्चा होती है और सहमति-असहमति इसका हिस्सा है।

ये था विवाद 

दरअसल 19 नवंबर को कॉलेजियम ने राजस्थान और दिल्ली हाईकोर्ट के सीजे प्रदीप नंद्राजोग और राजेंद्र मेनन को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश का फैसला लिया था। लेकिन बाद में 5-6 जनवरी को इन दोनों की जगह कॉलेजियम ने दिनेश माहेश्वरी और संजीव खन्ना के नाम की सिफारिश की। खन्ना दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस हैं, जबकि माहेश्वरी कर्नाटक हाईकोर्ट के सीजे।

कॉलेजियम  के इस फैसले के विरोध में सुप्रीम कोर्ट के जज संजय कौल ने सीजेआई रंजन गोगोई को खत लिखा था। खत में कौल ने कहा है कि जिन नामों पर विचार किया गया है, उनमें सीजे नंद्राजोग सबसे वरिष्ठ जज हैं। उन्हें नजरअंदाज करने से एक गलत संकेत मिलता है। कौल का कहना थी वह (नंद्राजोग) सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।