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दिल्ली पुलिस की बड़ी कामयाबी, नेपाली लड़कियों को खाड़ी देशों में बेचने वाला तस्कर गिरफ्तार

मानव तस्कर नेपाली नागरिक गिरफ्तार (फोटो-अरविंद ओझा)

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने नेपाली लड़कियों को खाड़ी देशों में बेचने वाले एक मानव तस्कर को दिल्ली से गिरफ्तार किया है. चौंकाने वाली बात यह है कि जब इस आरोपी को स्पेशल सेल की टीम पकड़ने के लिए इसका पीछा कर रही थी, तो यह पुलिस से बचने के लिए आईएसबीटी के पास यमुना में कूद गया. इसके बाद रेड में शामिल स्पेशल सेल के एक कांस्टेबल मनोज त्यागी ने यमुना में कूदकर आरोपी को पकड़ा.

बता दें कि नेपाल का रहने वाला यह आरोपी लोपसंग लामा काफी देर तक यमुना में तैरकर पुलिस से बचने की कोशिश करता रहा, पर स्पेशल सेल के कांस्टेबल मनोज त्यागी ने आखिरकार उसे पकड़ लिया. इससे पहले 25 जुलाई 2018 को वसंत विहार के मुनीरका में दिल्ली महिला आयोग (डीसीडब्लू) की प्रमुख स्वाति मालीवाल ने रेड कर 16 नेपाली लड़कियों को बचाया था. उस वक्त से ही नेपाली लड़कियों की खरीद-फरोख्त का मास्टरमाइंड लामा फरार चल रहा था.

पुलिस ने लोपसंग लामा पर 1 लाख रुपए का इनाम भी रखा था. आरोपी लामा के पिता असम राइफल के रिटायर्ड जवान हैं. लंबे वक्त से आरोपी नेपाल की लड़कियों को जॉब के नाम पर खाड़ी देशों में बेच दिया करता था. बदले में 40 से 50 हजार रुपए हर लड़की को बेचकर कमाता था. अब तक आरोपी करीब दो दर्जन से ज्यादा नेपाली लड़कियों को खाड़ी और दूसरे देशों में भेज चुका है. पुलिस सूत्रों के मुताबिक जॉब के नाम पर नेपाल से बाहर भेजी गई ज्यादातर लड़कियों को जिस्मफरोशी के धंधे में भी धकेल दिया जाता है.

पिछले साल अगस्त में दिल्ली में एक ऐसी ही बड़ी कार्रवाई के तहत दिल्ली महिला आयोग ने मानव तस्करी की पीड़ित 39 नोपाली लड़कियों को बचाया था. आयोग को खुफिया जानकारी मिली थी जिसके बाद दिल्ली के पहाड़गंज स्थित होटल ह्रदय से इन लड़कियों को बचाया गया था. उस कार्रवाई के बारे में डीसीडब्लू प्रमुख स्वाति मालीवाल ने बताया था कि छापेमारी पूरी रात चली और इसके लिए दिल्ली पुलिस ने सहायता मुहैया कराई थी. पूरे होटल में तस्करी कर लाई गई नेपाली लड़कियां मौजूद थी, जिन्हें खाड़ी देशों में भेजा जाना था.

इससे पहले आयोग ने 18 महिलाओं को बचाया था जिसमें से दो बंगाल और बाकी की लड़कियां नेपाल की रहने वाली थीं. दिल्ली महिला आयोग ने एक सप्ताह के भीतर तीन बचाव अभियान चलाए थे जिसमें 73 नेपाली लड़कियों को मुनीरका, मैदान गड़ी और पहाड़गंज से बचाया गया था.