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पाक में रची जा रही थी भारत को दहलाने की साजिश, आतंकियों के निशाने पर थे देश के कई नेता

पाक में रची जा रही थी भारत को दहलाने की साजिश, आतंकियों के निशाने पर थे देश के कई नेता

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ के लिए काम करने वाले तीन शार्प शूटरों को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार किया है। यह तीनों पाकिस्तान में बैठे अंडरव‌र्ल्ड डॉन रसूल खान के साथ मिलकर गणतंत्र दिवस पर देश को दहलाने की साजिश रच रहे थे। इनके निशाने पर दक्षिण भारत के दो बड़े नेताओं सहित आरएसएस के पदाधिकारी थे। पकड़े गए शूटरों की पहचान वली मोहम्मद सैफी, शेख रियाजुद्दीन उर्फ राजा और मुहतासिम सीएम उर्फ थस्लीम के रूप मे हुई है। वली मोहम्मद अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ का रहने वाला है, जबिक शेख रियाजुद्दीन दिल्ली के मदनगीर और मुहतासिम केरल के कासरगौड का रहने वाला है। वली मोहम्मद और शेख रियाजुद्दीन को दिल्ली से, जबकि मुहतासिम को केरल से गिरफ्तार किया गया।

स्पेशल सेल के सूत्रों के मुताबिक आपरेशन का मास्टर माइंड पाकिस्तान में रसूल खान था, जो केरल निवासी मुहतासिम के संपर्क में था। आरोपितों के पास से दो पिस्टल, छह कारतूस और मोबाइल बरामद किए गए हैं। स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त प्रमोद कुमार कुशवाहा के मुताबिक खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि पाकिस्तान में बैठा अंडरव‌र्ल्ड डॉन रसूल खान भारत में वारदात की साजिश रच रहा है।

वह भारत में रह रहे आइएसआइ के लिए काम करने वाले शार्प शूटरों की मदद से दक्षिण भारत के कुछ नेताओं और आरएसएस के पदाधिकारियों की हत्या की योजना बना रहा है। सूचना के बाद स्पेशल सेल की टीम ने 11 जनवरी को दिल्ली के साकेत इलाके से वली मोहम्मद सैफी और शेख रियाजुद्दीन उर्फ राजा को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ के बाद मुहतासिम सीएम उर्फ थस्लीम को केरल से दबोचा गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक खुफिया एजेंसी को जानकारी मिली थी कि रसूल खान केरल के नेटवर्क से जुड़े एक संदिग्ध से लगातार बातचीत कर रहा है। बाद में इसकी जानकारी स्पेशल सेल को दी गई। ढाई महीने से स्पेशल सेल के अधिकारी इस नेटवर्क पर नजर रखे हुए थे, जिसके बाद इनकी गिरफ्तारी संभव हो सकी।

इस ऑपरेशन के मास्टर माइंड पाकिस्तान का अंडरव‌र्ल्ड डॉन रसूल खान उर्फ पार्टी है। वह आरोपितों से लगातार संपर्क में था। रसूल वर्ष 2003 में गुजरात के पूर्व गृह मंत्री हरेन पांड्या की हत्या का मुख्य षडयंत्रकारी भी है। इसके अलावा गुजरात व केरल के करीब आधा दर्जन मामलों में भी उसका नाम सामने आ चुका है। हालांकि, सीमापार से ऑपरेशन को अंजाम देने के कारण एजेंसियां उसके खिलाफ सुबूत एकत्र नहीं कर सकीं। रसूल ने सीएम उर्फ थस्लीम के जरिये नेटवर्क खड़ा किया था। उससे पूछताछ में एजेंसियों को रसूल और साजिश का पता चला।

45 वर्षीय वली मोहम्मद अफगानिस्तान के मजार-ए-शरीफ का मूल निवासी है। उसने 12वीं तक पढ़ाई की है। पहले वह पुरानी कारों की खरीद-बिक्री का काम करता था। वह 2016 में थस्लीम से दुबई में संपर्क में आया। वह पहले कई बार टूरिस्ट और मेडिकल वीजा पर भारत भी आ चुका है। अंतिम बार वह गत वर्ष दिसंबर महीने में टूरिस्ट वीजा पर भारत आया था।

इसी दौरान उसका संपर्क अन्य अफगानी नागरिक अब्दुल्ला के माध्यम से शेख रियाजुद्दीन उर्फ राजा से हुआ। रियाजुद्दीन से अफगानी अब्दुल्ला की मुलाकात तिहाड़ में उस समय हुई थी जब वह हत्या के एक मामले में जेल गया था। 32 वर्षीय रियाजुद्दीन ओडिशा से सन 2006 में रोजगार की तलाश में दिल्ली आया था। वह वेल्डर का काम करता था। वर्ष 2007 में पुलिस ने चोरी के एक मामले में उसे गिरफ्तार किया था। वह चोरी व अन्य घटनाओं सहित छह मामले दर्ज हैं।

वहीं 41 वर्ष के केरल निवासी सीएम उर्फ थस्लीम ने मात्र 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है। वह 13 वर्ष की उम्र से मुंबई में तस्करी का सामान बेचने लगा। इसके बाद वह 1999 में दुबई चला गया, वहां थस्लीम शराब का कारोबार करता था। उस पर दंगा सहित आठ आपराधिक मामले दर्ज हैं। रसूल का बेहद करीबी है।

शुरुआत जांच और पूछताछ में पता चला है कि दक्षिण भारत के सामाजिक और धार्मिक संगठनों में अहम पद और रुतबा रखने वाले इनके निशाने पर थे और आतंकी इनकी हत्या कर देश में सनसनी फैलाना चाहते थे।

वहीं खुफिया अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे आतंकियों की खौफनाक साजिश हो सकती है। आतंकी बड़े स्तर पर मंदिरों को अपना निशाना बनाना चाहते हैं, जिससे दक्षिण भारत के हालात खराब हों।