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कांग्रेस को समर्थन पर VHP की सफाई, कहा- राम मंदिर के लिए सब आएं साथ

आलोक कुमार (फाइल फोटो)

राम मंदिर मुद्दे को लेकर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने की बात पर विश्व हिन्दू परिषद की सफाई आई है. संगठन के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि कांग्रेस को समर्थन का कोई प्रस्ताव नहीं दिया गया है. वीएचपी किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं करती. साथ ही उन्होंने कहा कि राम मंदिर मुद्दे पर सभी दलों का समर्थन जुटा रहे हैं.

इससे पहले उन्होंने कहा था कि कांग्रेस अगर लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में राम मंदिर का मुद्दा शामिल करेगी तो समर्थन पर विचार करेंगे. आलोक कुमार ने कहा, ‘राम मंदिर के लिए जिन्होंने खुले तौर पर वादा किया है, अगर कांग्रेस घोषणा पत्र में शामिल करे कि मंदिर बनाएंगे तो उसके (कांग्रेस) के बारे में भी विचार करेंगे.उसने जो प्रतिबंध लगाया है कि संघ के स्वयंसेवक कांग्रेस में नहीं जा सकते उसको वापस ले. केवल जनेऊ पहनने से नहीं होगा.’ नए साल के पहले सप्ताह में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राम मंदिर के निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि अयोध्या राम मंदिर का मसला अभी कोर्ट में है. साथ ही उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में नौकरी और किसानों से जुड़े मुद्दे पर अहम होंगे.

आजतक से बातचीत में राहुल ने कहा था, ‘राम मंदिर का मामला कोर्ट में है, लेकिन 2019 के चुनाव में नौकरी, किसानों की चिंता, भ्रष्टाचार जैसे मसलों पर अहम होंगे.’ इस बीच वीएचपी के इस बयान को बीजेपी के लिए बड़ा झटका भी माना जा रहा था. कयासों के बीच यह भी कहा गया कि वीएचपी का बीजेपी पर से मंदिर मसले को लेकर विश्वास डगमगा रहा है.

इसका अंदाजा आलोक कुमार के बयान से लगाया जा सकता है. उन्होंने कुंभ में केंद्र की मोदी सरकार पर इशारे-इशारे में निशाना साधा और कहा, ‘अब हमको ऐसा लग रहा है कि सरकार की मजबूरियां क्या है वो तो हम नहीं जानते, लेकिन संभवत: इस सरकार के इस कार्यकाल में कानून आने की संभावना नहीं है. हम देश की सारी परिस्थितियों को संतों के सामने रखेंगे और पूछेंगे कि आगे क्या करना है. संत जैसा मार्गदर्शन करेंगे इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे. मैं आपसे कहूं अभी तुरंत आम चुनाव से पहले मंदिर बने इसकी संभावना अब ज्यादा नहीं है.’

हालांकि अब आलोक कुमार ने सफाई पेश करते हुए कहा है कि वीएचपी ने कांग्रेस को समर्थन का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है. बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे राजीव गांधी द्वारा मंदिर के ताले खुलवाने के बाद बड़ी संख्या में लोग और हिन्दू संगठन उनके साथ आ गए थे. जिसके बाद कांग्रेस जमीन से लेकर संसद तक मजबूत हुई थी. ऐसे में अगर कांग्रेस राम मंदिर के लिए अपने दरवाजे खोलती है और अपने घोषणापत्र में वीएचपी की बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर मसले को शामिल कर लेती है तो बीजेपी को आगामी लोकसभा चुनाव में बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है.

राम मंदिर को लेकर कांग्रस धीमी आवाज में ही सही लेकिन मसले पर समर्थन करती रही है. हाल ही में उत्तराखंड के वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद ही हो पाएगा. रावत ने कहा था, ‘हमलोग नीतियों और संविधान में आस्था रखते हैं. अयोध्या में राम मंदिर तभी बन पायेगा जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनेगी. यह पक्की बात है.’

वहीं, उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर ने हाल ही में कहा था कि राम मंदिर अयोध्या में नहीं बनेगा तो और कहां बनेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा, ‘अयोध्या में मंदिर कहां बनेगा, यह फैसला कोर्ट में ही तय हो सकता है. उन्होंने कहा था कि भगवान राम के मंदिर को लेकर कौन नहीं चाहता है. चाहे वो हिंदू हो, मुस्लिम हो, सिख हो या इसाई. हर व्यक्ति चाहता है कि राम मंदिर बने.’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के अपने इंटरव्यू में राम मंदिर मसले पर कहा था कि ये मामला अभी कोर्ट में है, ऐसे में सरकार न्यायिक प्रक्रिया पूरा होने का इंतजार करेगी. वहीं, आरएसएस के भैय्याजी जोशी के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने 2025 तक मंदिर निर्माण की प्रक्रिया पूरा करने की बात कही थी. जोशी ने कहा था, ‘हमारी इच्छा है कि 2025 तक अयोध्या में राम मंदिर बन जाए. मैंने 2025 में शुरू करने की बात नहीं की, आज शुरू होगा तो 5 वर्षों में बनेगा.’