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उत्तर प्रदेश में बड़ी कंपनियों के खाद्य पदार्थों में मिलावट पर कसेगा शिकंजा

उत्तर प्रदेश में बड़ी कंपनियों के खाद्य पदार्थों में मिलावट पर कसेगा शिकंजा

चौंकाने वाली खबर है कि जिन डिब्बाबंद ब्रांडेड खाद्य पदार्थों को हम और आप पूरे विश्वास के साथ घर ले जाते हैैं, दूध, दाल, हल्दी और घी-तेल जैसे इन पदार्थों में खतरनाक और जानलेवा मिलावट पाई गई है। ऐसे उत्पाद बनाने वालों में कई नामचीन बड़ी कंपनियां भी शामिल हैैं। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन ने बताया कि इन कंपनियों पर मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी कर ली गई है।

मानक केंद्र से मंगाए जाएंगे

अपर मुख्य सचिव ने हालांकि कंपनियों के नाम जाहिर नहीं किए हैैं लेकिन, उन्होंने कैंसर और लकवा जैसी बीमारी देने वाले रसायनों की मिलावट को गंभीर मामला ठहराते हुए विभाग द्वारा की जाने वाली जांच की प्रक्रिया में सुधार के लिए बड़े बदलाव के संकेत दिए हैैं। जैन ने बताया कि अब जिस दिन खाद्य पदार्थों के नमूने लिए जाएंगे, उसी दिन मुख्यालय भेजे जाएंगे। खाद्य पदार्थों की सभी छह श्रेणियों में लिए गए नमूनों की जिलेवार रिपोर्ट के साथ यह भी रिपोर्ट बनेगी कि नमूनों की जांच के लिए कितने जूनियर एनालिस्ट की जरूरत है, कितने कार्यरत हैं और जो हैैं, वे प्रतिदिन कितने नमूनों का विश्लेषण कर रहे हैैं। मल्टी ग्रेन ब्रेड की तरह जिन खाद्य पदार्थों के मानक प्रदेश में नहीं हैैं, उनके मानक केंद्र से मंगाए जाएंगे। ज्वलनशील पदार्थों से नमूनों की जांच होने के कारण एक हफ्ते में लैब की अग्नि सुरक्षा की भी जांच की जाएगी। इसी तरह घातक नमूनों के मामले में जिलेवार रिपोर्ट तैयार कर निस्तारण में भी तेजी लाई जाएगी।दो हफ्ते पहले कार्यभार संभालने के बाद अपर मुख्य सचिव अनीता भटनागर जैन ने लखनऊ स्थित विभागीय प्रयोगशाला में कामकाज का जायजा लिया तो कई चौंकाने वाले सच सामने आ गए। निरीक्षण के दौरान जैन को एक बंडल में बंधी अक्टूबर से दिसंबर तक की वह 164 पुरानी रिपोर्ट मिलीं, जो भेजी ही नहीं गईं। इसी तरह 270 रिपोर्ट प्रेषित होने का इंतजार कर रही थीं। जांच में सामने आया कि अनाज की रिपोर्ट 26 नवंबर, घी-तेल की रिपोर्ट 13 दिसंबर, मसाले की रिपोर्ट 26 दिसंबर और अन्य विविध रिपोर्ट 12 नवंबर से भेजी ही नहीं गईं। इस पर अपर मुख्य सचिव ने संबंधित जूनियर एनालिस्ट पर कार्रवाई के निर्देश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त को दिए हैैं। निरीक्षण में पुरानी रिपोर्ट मिलने पर वह 12 नवंबर की तारीख में इस पर हस्ताक्षर करने की कोशिश रहे थे। इस साल अब तक दवाओं के पांच हजार और खाद्य पदार्थों के 21 हजार सहित कुल 26 हजार नमूने बटोरने वाले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के कमोबेश हर सेक्शन में जांच के लिए नमूने लंबित हैैं। अपर मुख्य सचिव ने बताया कि नमूनों के लिए विभाग में पर्याप्त लोग ही नहीं हैैं। जांच में देर का सीधा फायदा मिलावट करने वाली कंपनियों को मिल रहा है, क्योंकि रिपोर्ट आने तक उनका सारा स्टॉक बिक चुका होता है।खाद्य पदार्थों के नमूनों की जांच में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग को दूध में डिटर्जेंट पाउडर और हल्दी में कैसर का कारण बनने वाला केमिकल मिला है। पिसी मिर्च के पैकेट में एक तरफ छोटा सा लिखा पाया गया कि यह खाने योग्य नहीं है। इसी तरह रिफाइंड ऑयल में निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाला खतरनाक सनसेट कलर और अरहर की दाल में लकवा के खतरे वाली खरारी जैसी मिलावट मिली है।