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सवर्ण आरक्षण पर अपनी ही पार्टी के स्टैंड के खिलाफ हुए RJD नेता रघुवंश प्रसाद सिंह

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह (फाइल फोटो-PTI)

राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह ने पार्टी से अलग लाइन लेते हुए सवर्ण आरक्षण के विरोध को चूक बताया है. रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि पार्टी इस पर बैठकर विचार करेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी को स्टैंड लेने में गलती हुई. हमारे घोषणा पत्र में आर्थिक आधार पर सवर्णों के आरक्षण की मांग की गई है, लेकिन पता नहीं कैसे पार्टी ने विरोध का स्टैंड ले लिया.

रघुवंश प्रसाद सिंह आरजेडी का सवर्ण चेहरा हैं. राजपूत जाति से आने वाले इस कद्दावर नेता ने पिछड़ों की हिमायती पार्टी आरजेडी में रह कर राजनीति का लंबा सफर तय किया. समाजवादी आंदोलन में शुरू से जुड़े रघुवंश प्रसाद सिंह दो बार विधायक और पांच बार सांसद रह चुके हैं और यूपीए 1 में केन्द्रीय मंत्री भी रहे. 2009 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी जब सिर्फ चार सीटों पर ही जीत पाई थी, उसमें लालू प्रसाद यादव के अलावा 3 सीटों पर राजपूत जाति के उम्मीदवारों को सफलता मिली थी. उनमें से एक रघुवंश प्रसाद सिंह थे.

हम विचार करेंगे

पटना में बुधवार को रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि हमारी पार्टी सवर्णो के आरक्षण के खिलाफ नहीं है. हमारी पार्टी से सवर्ण आरक्षण मामले में चूक हुई है और हम इस पर विचार करेंगे. जबकि आरजेडी की तरफ से लोकसभा में सांसद जयप्रकाश नारायण, राज्यसभा सांसद मनोज झा ने खुलकर विरोध किया. यहीं नहीं अभी पार्टी के सर्वेसर्वा तेजस्वी यादव ने सवर्णों को 10 प्रतिशत आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने का विरोध किया था, लेकिन रघुवंश प्रसाद सिंह ने इससे अलग लाइन ले ली है.

केवल आरक्षण पर ही नहीं यूपी में मायावाती, अखिलेश के गठबंधन को भी रघुवंश प्रसाद सिंह ने गलत बताते हुए कहा कि बिना कांग्रेस को साथ लिए बीजेपी का विकल्प नहीं बना जा सकता है, जबकि तेजस्वी यादव माया अखिलेश के गठबंधन से इतने खुश हुए कि वो उनको बधाई देने लखनऊ पहुंच गए.

तेजस्वी ने किया था विरोध

बता दें, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने सवर्ण गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए आए संविधान संशोधन विधेयक का खुले तौर पर विरोध किया था और कहा था कि यह आरक्षण दलित, पिछड़ों और आदिवासियों को मिलने वाले आरक्षण को खत्म करने की साजिश है.

उन्होंने कहा था कि 15 फीसदी सवर्ण आबादी को अगर 10 फीसदी आरक्षण दिए जाने की कोशिश हो रही है तो फिर 52 फीसदी ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के दायरे को बढ़ाया जाए. तेजस्वी के बयान के बाद लोकसभा में आरजेडी सांसद इस विधेयक का विरोध करते हुए वॉकआउट कर गए थे. जबकि राज्यसभा में सदस्यों ने बिल के विरोध में वोट डाला था.

गरीब ब्राह्मण….एक काल्पनिक कहानी

राज्यसभा में आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा था कि बचपन में हम सबने कहानी पढ़ी है कि एक गरीब ब्राह्मण था, लेकिन कभी सुना है कि एक गरीब दलित था, एक गरीब कुम्हार था, एक गरीब कुर्मी था, एक गरीब यादव था. कभी नहीं सुना होगा. क्योंकि यह हकीकत है. कहानियां काल्पनिक चीजों पर ही बनती हैं. हकीकत पर कहानियां नहीं बनती हैं.