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तेजस्वी बोले, सपा-बसपा गठबंधन के बाद PM मोदी का बनारस से चुनाव जीतना मुश्किल

Tejashwi Yadav (Courtecy- Twitter)

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के 2 दिवसीय दौरे से लौटने के बाद राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal) के नेता तेजस्वी यादव ने आजतक से खास बातचीत की. उन्होंने कहा कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के एक साथ आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बनारस से चुनाव जीतना लगभग नामुमकिन हो गया.

तेजस्वी यादव ने कहा कि मायावती और अखिलेश यादव के एक साथ आने से लालू प्रसाद यादव के महागठबंधन की परिकल्पना साकार हुई है. मायावती और अखिलेश यादव का साथ आना ऐतिहासिक कदम है. लोकतंत्र को बचाने के लिए दोनों का साथ आना बहुत जरूरी था. भविष्य में लोग मायावती और अखिलेश यादव के साथ आने के फैसले को सही मानेंगे.

कुछ दिनों के बाद लोगों को एहसास हो जाएगा कि मायावती और अखिलेश यादव का साथ आना राजनीतिक फायदे या फिर नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए नहीं था. बीजेपी और आरएसएस के लोग सबसे बड़े जातिवादी लोग हैं. बिहार में आरजेडी कांग्रेस के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी. एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि हम तो लगातार कहेंगे कि सभी पार्टियां एकजुट होकर लड़ें. उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस से बड़ी पार्टी है.

मायावती और अखिलेश यादव के साथ आने के बाद अब यह सवाल उठने लगे हैं कि नरेंद्र मोदी बनारस से चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं? उन्होंने कहा कि बिहार में कांग्रेस महागठबंधन का हिस्सा है. कांग्रेस आरजेडी की पुरानी सहयोगी दल रही है. कांग्रेस पार्टी जब-जब मुसीबत में रही है, तब-तब लालू प्रसाद यादव सोनिया गांधी के साथ खड़े रहे हैं.

एक सवाल के जवाब में आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि कांग्रेस को बिहार में महागठबंधन से बाहर करने का कचरा हमारे दिमाग में नहीं घूमता है. महागठबंधन में सीटों के तालमेल की घोषणा पत्रकारों के बीच होगी. देश के लिए आरजेडी समेत सभी दलों को कुर्बानी देनी पड़ेगी. आपको बता दें कि समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन के ऐलान के बाद तेजस्वी यादव लखनऊ पहुंचे थे. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती के पैर छूकर आशीर्वाद लिया था. साथ ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की थी.

आपको बता दें कि 12 जनवरी को समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच गठबंधन का ऐलान हुआ था. दोनों दलों ने उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है. इसके अलावा दोनों दलों के बीच अमेठी और रायबरेली समेत 4 सीटों को छोड़ने पर सहमति बनी है. हालांकि, इस गठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखा गया है. वहीं, कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपने दम पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अब उनकी पार्टी सूबे की सभी 80 सीटों पर जोरशोर से चुनाव लड़ेगी. इसके साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी कह चुके हैं कि कांग्रेस अपने आदर्शों पर चुनाव में उतरेगी और सभी को चौंकाएगी.