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गोली लगने से घायल रोहित की मौत, भाई को नशेड़ी बनाने के कारण मारी थी गोली

गोली लगने से घायल रोहित की मौत, भाई को नशेड़ी बनाने के कारण मारी थी गोली

वर्ष 2010 में नैनीताल डीएसबी से छात्रसंघ कोषाध्यक्ष का चुनाव लड़कर राजनीति में कॅरियर बनाने की सोचने वाले युवा का अंत ऐसा होगा शायद किसी ने नहीं सोचा होगा। वह नशे के दलदल में ऐसे फंसा कि उससे बाहर निकलने के लिए उसे अपनी मौत देखनी पड़ी। 2007 में इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद रोहित ने डीएसबी कॉलेज नैनीताल में बीकॉम में प्रवेश लिया। स्वभाव से मिलनसार और छात्रों की मदद के लिए हमेशा तैयार करने की वजह से उसने कुछ ही समय में कॉलेज में अच्छी पैठ भी बना ली। बीकॉम तृतीय वर्ष में उसने छात्रसंघ कोषाध्यक्ष पद के लिए चुनाव भी लड़कर किस्मत भी अजमाई, लेकिन किसी कारणवश वह चुनाव हार गया। यहीं से उसके जीवन में नशा करने की शुरूआत हो गई। शुरू में यार-दोस्तों के साथ हल्का-फुल्का नशा करना उसके जीवन में मौत का कारण बन जाएगा। यह शायद उसे पता नहीं था।रोहित को छात्र जीवन से ही जानने वाले कुछ लोगों ने बताया कि वह चुनाव हारने के कुछ समय बाद हल्का फुल्का नशा करने लगा था, लेकिन वह नशा करता है इस बात की जानकारी न तो घर वालों को थी और न ही उसके करीबियों को। 2013 के बाद धीरे-धीरे वह नशा करते-करते तस्करी भी करने लगा था। सूत्र बताते हैं कि वह काशीपुर और रामनगर के कुछ लोगों के संपर्क में आया तो उसको तस्करी कर पैसे कमाने का शौक भी चढ़ गया। 16 मार्च 2018 को पहली बार पुलिस ने उसे नैनीताल में पहली बार पकड़ा था, स्मैक कम होने के कारण पुलिस ने उसे जमानत पर रिहा कर दिया था। घर की माली स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उसकी जमानत में घर के दस्तावेज लगाने पड़े थे।रोहित को गोली मारने वाले आरोपित ने पुलिस के सामने कबूल किया कि उसने रोहित को स्मैक बेचने के लिए मार दिया। क्योंकि उसका भाई बर्बाद हो गया था। अब इसमें सवाल यह उठता है कि इन आरोपितों को ऐसा अधिकार किसने दिया। नगर में लंबे समय से स्मैक बेची जा रही है पुलिस ने इस पर अब तक क्यों कार्रवाई नहीं की।जिस मां ने अपने बेटे को जान से भी ज्यादा प्यार किया, उसको पाल पोश कर बड़ा किया। वह मां आज बिल्कुल टूट चुकी है और बार-बार यही शब्द निकल रहे हैं कि मैं कैसे रहूंगी। मां बिलख कर बोली मेरा बेटा गलत तो पुलिस ने उस पर कार्रवाई क्यों नहीं की, उसे जान से क्यों मारा। रोहित की एक वर्ष पहले की शादी हुई थी, अब उसकी मौत के बाद पत्नी बेसुध है। उसका श्रंगार एक साल बाद ही उजड़ जाएगा उसने कभी नहीं सोचा होगा।ऐसे ही एक नहीं कई युवा पहाड़ों में नशे की चपेट में हैं जो नशा करने के साथ-साथ बाद में खर्चे चलाने को तस्करी भी करने लगते हैं। पर्वतीय क्षेत्रों की रीढ़ कहे जाने वाले इन युवाओं का नशे की चपेट में आना सोचनीय विषय है। इसे यदि समय रहते नहीं रोका गया तो आने वाले कुछ सालों बाद स्थिति और खराब हो सकती है। पुलिस-प्रशासन की सुस्ती इस काले कारोबार में पंख लगा रही है। पहाड़ों से मैदानी क्षेत्रों में और मैदानी क्षेत्रों से पहाड़ों में खूब शराब, चरस समेत कई प्रकार के नशीली चीजों का कारोबार चल रहा है, लेकिन पुलिस इस पर आज तक शिकंजा नहीं कस पा रही है। जिसके कारण कई घर बर्बाद हो चुके हैं और कई बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं।