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CBI डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर बुलाई गई सेलेक्ट कमेटी की बैठक बेनतीजा रही

CBI दफ्तर (फाइल फोटो)

सीबीआई डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर बुलाई गई सेलेक्ट कमेटी की बैठक बेनतीजा रही. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पीएम आवास पर हुई इस बैठक में खुद प्रधानमंत्री, जस्टिस सीकरी और लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हुए. सूत्रों के मुताबिक, CBI निदेशक को लेकर सेलेक्ट कमिटी की बैठक में खड़गे अपनी बातों को रखने के लिए खत के साथ पहुंचे.

क्या बातें थीं खत में

– CVC की जिस रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने CBI निदेशक को छुट्टी पर भेजा उसे दिखाया जाए.

– सेलेक्ट कमेटी के सामने आलोक वर्मा को पक्ष रखने का मौका नहीं मिला. उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका मिलना चाहिए

– छुट्टी पर भेजे जाने के कारण आलोक वर्मा के कार्यकाल में जो 77 दिनों कमी आई, उसकी भरपाई हो.

– आधी रात को हुई कार्रवाई की उच्च अधिकार प्राप्त कमिटी जांच करे और उसकी रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए.

– इसके बावजूद अगर वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला लिया गया तो खड़गे अपनी आपत्ति और विरोध दर्ज कराने को तैयार थे.

सूत्रों के मुताबिक, खड़गे ने जब पहला प्वाइंट रखा तो पीएम ने सीवीसी के जिस दस्तावेज के आधार पर आलोक वर्मा को हटाया गया था वो सदस्यों को दे दिए. खड़गे की मांग एक तरीके से बिना खत सौंपे ही मान ली गई.

इसके बाद खड़गे ने अपना तैयार खत सौंपा ही नहीं. रिपोर्ट मिलते ही खड़गे ने कहा कि मुझे इनको पढ़ने के लिए वक़्त चाहिए, जिसको मान लिया गया. इसके बाद दोबारा बैठक बुलाए जाने का फैसला हुआ है.

आलोक वर्मा ने लौटते ही नागेश्वर राव के किए अहम तबादले रद्द किए

वहीं जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के 77 दिन बाद बुधवार को अपनी ड्यूटी पर लौटे सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने तत्कालीन निदेशक (प्रभारी) एम नागेश्वर द्वारा किए गए लगभग सारे तबादले रद्द कर दिए.

सुप्रीम कोर्ट ने वर्मा को छुट्टी पर भेजने के सरकारी आदेश को मंगलवार को ही रद्द कर दिया था. वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच तकरार शुरु होने के बाद सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था और उनके सारे अधिकार ले लिए थे. इसके बाद 1986 बैच के ओडिशा काडर के आईपीएस अधिकारी राव को 23 अक्टूबर, 2018 को देर रात को सीबीआई निदेशक के दायित्व और कार्य सौंपे गए थे.