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राजस्थान: पीएम की चिट्ठी के साथ भेजा गया आयुष्मान कार्ड, गहलोत सरकार ने लगाया यह आरोप

लोगों को भेजे गए प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर किए पत्र

राजस्थान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक पत्र ने अजीबोगरीब हालात पैदा कर दिए हैं. लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री के हस्ताक्षर किए पत्र लोगों को भेजा जा रहा है, जिसमें कहा जा रहा है कि आपका चयन आयुष्मान भारत के तहत निशुल्क इलाज के लिए हुआ है, लेकिन राजस्थान सरकार ने अभी तक इस योजना को लागू नहीं किया है. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि जिनका कार्ड मोदी सरकार भेज रही है उनके इलाज का पैसा कौन देगा. राजस्थान सरकार का कहना है कि मोदी सरकार बिना विश्वास में लिए एकतरफा काम कर रही है.

जयपुर के महेश नगर निवासी सीताराम सैनी के घर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चिट्ठी भेजी है, जिसमें प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत आयुष्मान भारत का कार्ड भेजा गया है, जिस पर इनके परिवार के सभी सदस्यों का नाम है. इसमें मोदी सरकार की योजनाओं के बखान के साथ साथ लिखा है कि 5 लाख का मुफ्त इलाज आप इस कार्ड के जरिए कर सकते हैं. हकीकत यह है कि इस कार्ड के जरिए राजस्थान में कहीं भी इलाज नहीं हो पाएगा, क्योंकि योजना अभी तक राजस्थान सरकार ने लागू नहीं किया है.

इसी तरह से बाबू लाल साहू और मोतीलाल भाखड़ के घर भी इस तरह के कार्ड आए हैं. हालांकि इन दोनों को यह पता नहीं है कि यह किस तरह का कार्ड है और इसकी क्या उपयोगिता है. राजस्थान में वसुंधरा राजे पहले ही इलाज के लिए भामाशाह कार्ड का वितरण कर चुकी है. करीब एक करोड़ से ज्यादा भामाशाह कार्ड लोगों को मिला हुआ है जबकि माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी के आयुष्मान भारत योजना लागू करने पर इसमें से केवल 59 लाख लोग ही मापदंड पर खरे उतरेंगे.

गहलोत सरकार के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि केंद्र की सरकार बिना हमें विश्वास में लिए सीधे चिट्ठियां भेज रही है. लाखों चिट्ठी भेज दी है, अब कौन इनका इलाज करेगा. दुसरी तरफ बीजेपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने कहा कि इस योजना में 60 फीसदी केन्द्र सरकार देती है और 40 फीसदी राज्य सरकार देती है. लिहाजा सरकार राजनीति करने के बजाय इस योजना को तुरंत लागू करे.

राजस्थान में करीब 4 लाख लोगों को नरेंद्र मोदी की तरफ से चिट्ठी भेजी गई है, जिसमें आयुष्मान भारत का कार्ड भी है. कई जगहों पर लोगों के पते या तो अधूरे हैं या बदल गए हैं. इस कारण लिहाजा 30 फीसदी कार्ड डाकघर में ही रखे गए हैं.