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अनुप्रिया पटेल बोलीं- आबादी के अनुपात में 27 फीसदी से बढ़ाया जाए OBC का आरक्षण

अपना दल-सोनेलाल की संरक्षक अनुप्रिया पटेल (फोटो-PTI)

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अनुप्रिया पटेल ने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से गठित सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठाया है. उन्होंने सरकार से जाति के आधार पर जनगणना कराने की मांग की. साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने पर यह माना जाएगा कि बीजेपी इस समिति की रिपोर्ट के जरिये पिछड़ों को बांटना चाहती है.

केंद्र और उत्तर प्रदेश की बीजेपी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक अपना दल-सोनेलाल की संरक्षक अनुप्रिया ने यहां कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा कि पिछले साल राज्य सरकार को सौंपी गई सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट में पिछड़े वर्ग को पिछड़ा, अति पिछड़ा और सर्वाधिक पिछड़ा श्रेणियों में बांटने की सिफारिश की है. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी आरक्षण के वर्गीकरण के खिलाफ नहीं है, लेकिन जातियों की आबादी के अध्ययन के बगैर ऐसा नहीं हो सकता.

जातियों की गणना की मांग

पटेल ने कहा कि अगर सरकार ने जातियों की आबादी का कोई अध्ययन किया है तो वह उसे जनता के सामने रखे. अगर नहीं किया है तो सामाजिक न्याय समिति की सिफारिशों का कोई आधार ही नहीं है. आरक्षण के वर्गीकरण के लिए जातीय जनगणना करानी ही होगी. जरूरत पड़े तो पिछड़ों के आरक्षण को 27 प्रतिशत से बढ़ाया जाए. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो उसकी मंशा पर सवाल उठेंगे. हम यही मानेंगे कि बीजेपी पिछड़ों को आरक्षण के नाम पर बांटना चाहती है.

अनुप्रिया ने कहा कि उनका भी मानना है ‘जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी’ होनी चाहिए. आरक्षण तो आबादी के अनुपात में ही मिलना चाहिए.

मालूम हो कि राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने मई 2018 में न्यायमूर्ति राघवेन्द्र कुमार की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति गठित की थी. इसका उद्देश्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण में आरक्षण उपलब्ध कराने की सम्भावनाओं का अध्ययन करना था. समिति ने अपनी रिपोर्ट में पिछड़ों को तीन श्रेणियों में बांटने की सिफारिश की थी. हालांकि उसकी तमाम सिफारिशों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं है.