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मोदी सरकार ने बैंकों से कहा- किसानों के दरवाजे पर जाकर उन्हें आसान शर्तो पर कर्ज दें

मोदी सरकार ने बैंकों से कहा- किसानों के दरवाजे पर जाकर उन्हें आसान शर्तो पर कर्ज दें

पिछले कुछ हफ्तों में कांग्रेस की कृषि कर्ज माफी योजना का कई बार आलोचना कर पीएम नरेंद्र मोदी ने यह संकेत दे दिया है कि उनकी सरकार राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के कर्ज को माफ करने के पक्ष में नहीं है, लेकिन सरकार के स्तर पर किसानों के लिए अलग से एक पैकेज देने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है जिसकी घोषणा जल्द होने के आसार है। इस बीच एनपीए के चंगुल से धीरे-धीरे निकल रही बैंकों को भी इस बात के लिए तैयार किया जा रहा है कि वे किसानों के लिए न सिर्फ अपने दरवाजे खोलें बल्कि स्वयं किसानों के दरवाजे पर जा कर उन्हें बेहद आसान शर्तो पर पर्याप्त कर्ज देने की व्यवस्था करे।वित्त मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि सरकारी बैंकों के लिए किसानों व ग्रामीण जनता को कर्ज देने के लिए नए नुस्खे आजमाने को कहा गया है। अभी कुछ राज्यों से इस तरह की खबरें आ रही थी कि जरुरत के बावजूद किसान कर्ज लेने की आगे नहीं आ रहे थे। बैंकों से कहा गया है कि वे अपने स्तर पर किसानों को कर्ज लेने के लिए आगे आने के लिए प्रोत्साहित करे।

बैंकों से कहा गया है कि वे गांव व ग्रामीण बाजारों में विशेष कैंप लगायें ताकि ज्यादा से ज्यादा कृषि कर्ज बांटा जा सके। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को कहा गया है कि वे क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के जरिए किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कर्ज वितरण को और प्रोत्साहित करे। पिछले वित्त वर्ष और चालू वित्त वर्ष के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए कर्ज वितरण की दर में बहुत ज्यादा वृद्धि नहीं हुई है।

आरबीआइ के डाटा के मुताबिक वर्ष 2016-17 में कृषि क्षेत्र की कर्ज वृद्धि दर 12.4 फीसद थी जो वर्ष 2017-18 में घट कर 3.4 फीसद रह गई थी। चालू वित्त वर्ष के पहले छह महीने में यह वृद्धि दर 5.8 फीसद की है। सरकार के स्तर पर भी कृषि कर्ज लेने के लिए प्रचार अभियान शुरु किया जा चुका है। वित्त मंत्री अरुण जेटली की जल्द ही सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ बैठक होने वाली है उसमें भी कृषि क्षेत्र को कर्ज वितरण सबसे अहम मुद्दा रहेगा।वित्त मंत्रालय की तरफ से इस कदम के पीछे एक वजह यह भी बताया जा रहा है कि कुछ राज्यों से बैंकों की तरफ से ही सरकार को बताया गया है कि किसानों की तरफ से कर्ज लेने में आई है। खास तौर पर जिन राज्यों में कर्ज माफी योजना लागू की गई है वहां के किसान जरुरत होने के बावजूद नए कर्ज नहीं ले रहे हैं। खास तौर पर राजस्थान और मध्य प्रदेश में इस तरह की घटनाओं के बारे में बैंकों ने सूचित किया है। ऐसे में सरकार की यह भी चिंता है कि कही इसका असर खाद्यान्न उत्पादन पर नहीं पड़े।जानकारों का मानना है कि अभी बैंकों के पास कर्ज देने लायक फंड की उपलब्धता भी बढ़ रही है। ताजे आंकड़े बताते हैं कि बैंकों के पास 30 हजार करोड़ रुपये की राशि अतिरिक्त है जिसे वे कर्ज देने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। जबकि दिवालिया कानून लागू होने से पुराने कर्ज की वसूली प्रक्रिया तेज होने से उनके पास काफी राशि आने वाली है। ऐसे में बैंक इस स्थिति में हैं कि वे किसानों को ज्यादा कर्ज दे सकते हैं।