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सबरीमाला विवाद: श्रीलंकाई महिला ने मंदिर में पूजा से किया इन्कार, बताई यह वजह

सबरीमाला विवाद: श्रीलंकाई महिला ने मंदिर में पूजा से किया इन्कार, बताई यह वजह

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर छिड़ा संग्राम थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच यह सूचना सामने आई थी कि श्रीलंका की 46 वर्षीय महिला ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करके पूजा-अर्चना की है। हालांकि, श्रीलंकाई महिला ने मंदिर में पूजा करने की बात से इन्कार किया है। उसने कहा है, ‘मैं मंदिर की पवित्र सीढ़ियों तक गई, लेकिन मुझे उससे आगे नहीं जाने दिया गया। मेरा पास मेडिकल सर्टिफिकेट भी था।’

दरअसल, श्रीलंकाई महिला ने मंदिर में प्रवेश को लेकर कथित तौर पर पुलिस को यह सूचित किया था कि उसका मासिक धर्म खत्म हो चुका है, यानी वह रजोनिवृत्ति तक पहुंच गई है। इसके लिए बकायदा उसने चिकित्सा प्रमाण पत्र भी दिखाया। इस सब के बावजूद भी महिला को मंदिर के अंदर जाने नहीं दिया गया, वह केवल पवित्र सीढ़ियों तक ही पहुंच पाई। इससे पहले बुधवार को दो महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर तीव्र विरोध प्रदर्शन हुआ। कई जगहों पर प्रदर्शन मार्च निकाले गए। इस दौरान मीडियाकर्मियों के अलावा कई लोगों को निशाना बनाया गया। इसे लेकर गुरुवार को केरल बंद का भी आह्वान किया गया। महिलाओं के प्रवेश में राज्यभर में हुए उग्र प्रदर्शन में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पुलिस के 38 जवानों समेत 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए। हिंसा में घायल हुए 55 वर्षीय चंदन उन्नीथन की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने 266 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया।

पहली बार किसी मसले पर एक सुर बोलती नजर आ रही कांग्रेस और भाजपा ने भी मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं की मंशा पर सवाल उठाए। कांग्रेस और भाजपा दोनों में मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाओं को माओवादी बताया। भाजपा के वी मुरलीधरन ने कहा कि जिन दो महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश किया वह भक्त नहीं माओवादी थी। तो वहीं, कांग्रेस सांसद के सुरेश बोले कि राज्य सरकार द्वारा स्पॉन्सर दो युवा महिला मंदिर में गईं। ये कार्यकर्ता और माओवादी हैं। राज्य सरकार सबरीमाला के भक्तों की भावनाओं को चुनौती दे रही है।गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन महीने बाद दो महिलाओं बिंदु अम्मीनी और कनक दुर्गा ने सबरीमाला मंदिर में प्रवेश कर पूजा की। पुलिस दोनों महिलाओं को लेकर मंदिर परिसर ले गई। दोनों ने काले वस्त्र पहन रखे थे। महिलाओं के दर्शन के बाद पुजारियों ने मंदिर का शुद्धीकरण किया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 28 सितंबर को मंदिर में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति प्रदान की थी।