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राफेल डील: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण का अटैक, 2014 तक डील क्यों नहीं कर पाई कांग्रेस

राफेल डील पर लोकसभा में आज सरकार की तरफ से रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने मोर्चा संभाला। अबतक रक्षा मंत्री के जवाब की मांग कर रही कांग्रेस पर रक्षा मंत्री ने तीखे वार किए। हर सवालों का सिलसिलेवार जवाब देते हुए रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर झूठ बोलने का आरोप लगाया। सीतारमण ने कांग्रेस ताबड़तोड़ हमले बोलते हुए कहा कि HAL पर कांग्रेस घड़ियाली आंसू बहा रही है। रक्षा मंत्री ने कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए कहा कि ‘डिफेंस डीलिंग’ और ‘डीलिंग इन डिफेंस’ में अंतर है। हम ‘डिफेंस डीलिंग’ नहीं करते हैं। हम लोग ‘डील इन डिफेंस’ करते हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। निर्मला ने राफेल पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ‘AA’ के आरोप पर पलटवार करते हुए उन्हें ‘RV’ और Q की याद दिला दी। दरअसल, रक्षा मंत्री के भाषण के दौरान जब कांग्रेस ने सवाल पूछा कि सौदा ‘AA’ के लिए किया गया? इस पर सीतारमण ने कांग्रेस को जवाब दिया कि अगर आप ‘AA’ की बात करते हैं तो हर AA के जवाब में एक RV (रॉबर्ट वाड्रा) और Q (ओत्तावियो क्वात्रोक्की) का नाम आ जाता है। साथ ही उन्होंने कहा कि RV पीएम नहीं देश के दामाद हैं। निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए कहा कि असल में वह सौदा करना ही नहीं चाहती थी। कांग्रेस पर राफेल डील को लटकाए रखने का आरोप लगाते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार के दौरान रक्षा मंत्रालय से दलालों से मुक्त हो गया। उन्होंने कहा कि पहला राफेल विमान इस साल आ रहा है और 2022 तक सभी विमान आ जाएंगे। सदन में विपक्ष के हंगामा करने पर रक्षा मंत्री ने तंज कसते हुए कहा कि विपक्ष के नेता मेरे जवाबों को नहीं सुनना चाहते हैं। यह काफी परेशान करने वाला है। उन्होंने कहा, ‘इस देश को समझना होगा कि रक्षा खरीद राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है और यह काफी महत्वपूर्ण है, चाहे हम सरकार में हों या वे।’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘हमारे पड़ोसी देशों के पास का माहौल सब जानते हैं। उन्होंने कहा, देश में कोई भी सरकार शांति चाहती है। चीन और पाकिस्तान अपनी वायु सेना को और मजबूत कर रहे हैं और हम अभी उससे काफी पीछे हैं। चीन के पास चौथी और पांचवी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट हैं।’ रक्षा मंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस जेट खरीदने की इच्छा ही नहीं रखती थी। रक्षा मंत्री ने अपने जवाब में कहा, ‘राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एचएएल कर्मचारियों के बीच में कहा कि राफेल उनका अधिकार है। राफेल उन्हें प्रॉड्यूस करना चाहिए था।’ रक्षा मंत्री ने कहा, ‘खड़गे जी जो स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य भी हैं, ने कहा था कि स्टैंडिंग कमिटी को यह जानकर दुख हुआ कि 3 दशक के बाद भी एचएएल को यह एयरक्राफ्ट नहीं बनाने दिया गया।’रक्षा मंत्री ने कहा, ‘कांग्रेस अब एचएएल के लिए मगरमछ के आंसू बहा रही है। कांग्रेस सरकार ने एचएएल को एक या दो नहीं बल्कि 53 वीवर दिए हैं। हमने भी करीब एक लाख करोड़ रुपये के कॉन्ट्रैक्ट दिए हैं। मैं पूछती हूं कि आपने हेलिकॉप्टर की डील अगुस्टा के साथ क्यों की? आपने एचएएल को कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं दिया। क्योंकि जो आपको अगुस्टा के साथ डील में मिला, वह एचएएल के साथ डील में नहीं मिलता। वहां से तो सिर्फ हेलिकॉप्टर ही मिलते।रक्षा मंत्री ने कहा, ‘एक कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस भारत की डिफेंस डील किसी विदेशी प्रमुख के साथ डिस्कस नहीं करेगी। यह चर्चा सरकार को फ्रांस के साथ करनी चाहिए हमारे साथ नहीं। इसके बाद राहुल गांधी ने सदन में कहा कि उन्होंने फ्रांस के राष्ट्रपति से डील में गोपनीयता की शर्त के बारे में पूछा, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। राहुल ने यह भी कहा कि उन्हें डील की कीमत को सार्वजनिक करने को लेकर भी कोई दिक्कत नहीं है। कौन सच बोल रहा है? इन दोनों कांग्रेस नेताओं में से कोई एक देश को भ्रमित कर रहा है। मैं यह साबित करना चाहती हूं।’

प्राइसिंग पर बात करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि सदन में हमने राफेल का बेसिक प्राइस बताया 670 करोड़, कांग्रेस ने कहा कि उन्हें 520 करोड़ में मिल रहा है। लेकिन कांग्रेस के पास इसे लेकर कोई डॉक्युमेंट नहीं है। हमने कांग्रेस की कीमत के मुकाबले 9 प्रतिशत सस्ती डील की है।सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट को पढ़ते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 34 में कहा गया कि सभी तथ्यों की जांच के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि डील में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। किसी का व्यक्तिगत धारणा के आधार जांच नहीं की जा सकती है।’ उन्होंने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 33 में कहा गया कि डील में सरकार की भूमिका कहीं भी ऐसी नहीं दिख रही कि सरकार ने किसी को कमर्शल फायदा पहुंचाने की कोशिश की है।’

कीमतों को गोपनीय बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 26 में कहा गया कि एयरक्राफ्ट की कीमत सार्वजनिक करने का कोई औचित्य नहीं है।’ उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 25 में कहा गया कि सरकार ने एयरक्राफ्ट की कीमत नहीं बताई क्योंकि यह संवेदनशील मुद्दा है। यह दो देशों के बीच हुए समझौते का उल्लंघन होता।रक्षा मंत्री के जवाब के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 2-3 मिनट का स्पष्टीकरण दिया और एक बार फिर सरकार पर हमला बोला। गांधी ने कहा, ‘मैक्रों से मैंने पूछा था कि क्या राफेल डील में कीमत का मसला भी गोपनीयता के दायरे में है। मुझे आश्चर्य हुआ कि जो पैसा हिंदुस्तान की जनता का है, उसके बारे में जनता को ही नहीं बताया जा रहा है। मैक्रों ने बताया था कि कीमत गोपनीयता के दायरे में नहीं आती। इसी तरह ओलांद ने कहा था कि अनिल अंबानी का नाम मुझे भारत के प्रधानमंत्री की तरफ से दिया गया था। ओलांद का बयान यह बताता है कि भारत के पीएम ने एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाया। मेरी सलाह है कि प्रधानमंत्री फोन मिलाए ओलांद को और उनसे पूछना चाहिए कि वह ऐसा क्यों कह रहे हैं।’