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भांजे-भतीजे के एनकाउंटर से बौखलाए जैश सरगना मसूद अजहर ने कश्मीर में भेजा अफगानी आतंकी!

कुख्यात आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का सरगना मसूद अजहर अपने भतीजे भांजे की मौत से बौखलाकर उसने एक अफगानी आतंकवादी को कश्मीर भेजा है। मसूद अजहर का भतीजा उस्मान मौलाना और भांजा तल्हा रशीद 30 अक्टूबर को सेना के साथ हुए एनकाउंटर में मारा गया था। इनका बदला लेने के लिए मसूद ने अब्दुल रशीद गाजी नाम के आतंकी को राज्य में आतंक फैलाने भेजा है। हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को मिली खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब्दुल रशीद गाजी जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर है। वह दिसंबर 2018 के शुरुआती दिनों में अवैध रूप से जम्मू-कश्मीर में दाखिल हुआ। माना जा रहा है कि गाजी 9 दिसंबर को घाटी पहुंचा था और महीने के आखिर में साउथ कश्मीर के पुलवामा इलाके में थे। करीब तीन सप्ताह के इस वक्त में उसके ज़्यादातर पैदल चलने और पब्लिक ट्रांसपोर्ट में ट्रैवल करने की रिपोर्ट्स हैं।

28 दिसंबर को सुरक्षा एजेंसियों के बीच हुई मीटिंग में अफगानिस्तान के इस पुराने आतंकी को ‘गंभीर खतरा’ बताया गया। इंटरसेप्ट और जासूसों से मिली जानकारी के मुताबिक गाजी के साथ जैश के दो आतंकवादी और हैं। इनपुट्स के मुताबिक, ‘गाजी को भेजने का मकसद मसूद के भांजे और भतीजे का बदला लेना है। गाजी का काम स्थानीय आतंकवादियों को ट्रेनिंग देना होगा, ताकि वो बदला ले सकें। इन नए लड़कों को हथियार छीनने के लिए भी कहा जाएगा, ताकि वो अपने पास असलहों का भंडार बना सकें।’

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक गाजी को भेजा जाना इसलिए भी तर्कसंगत नज़र आ रहा है, क्योंकि वह हथियारों और मुख्यत: विस्फोटकों का एक्सपर्ट है। वह अफगानिस्तान युद्ध में हिस्सा ले चुका है और अफगानिस्तान में रहते हुए अमेरिका सेनाओं के खिलाफ ऑपरेशन भी चला चुका है।

बीते कुछ महीनों से घाटी में सुरक्षा बल खूब ऐक्टिव हैं, जिससे आतंकी संगठनों को आतंकवादियों को ट्रेनिंग देने का मौका नहीं मिल रहा है। जो भी लड़के आतंकी संगठनों से हाथ मिलाते हैं, वो 6-7 महीने के अंदर साफ कर दिए जाते हैं। ऐसी स्थिति में आतंकी संगठन बौखलाए हुए हैं।जहां तक मसूद अजहर के भांजे-भतीजे की बात है, तो इन दोनों को सैन्यबलों ने 30 अक्टूबर 2018 को साउथ कश्मीर के ही त्राल इलाके में एनकाउंटर में खत्म कर दिया था। यह एनकाउंटर करीब 6 घंटे चला था। मसूद के भतीजे उस्मान को जैश के स्नाइपर शूटर दस्ते का कमांडर बताया जाता था। स्नाइपर्स का यह दस्ता घाटी में सुरक्षाबलों के नया सिरदर्द बनकर उभरा है। इस एनकाउंटर के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने सैनिकों पर पथराव करके आतंकियों को बचाने की भी कोशिश की थी।