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कर्नाटक: विभाग बंटवारे पर सिद्धारमैया पर भड़के डेप्युटी सीएम परमेश्वर, राहुल गांधी लेंगे फैसला

बेंगलुरु
एचडी कुमारस्वामी कैबिनेट में शामिल हुए नए मंत्रियों को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। पहले कैबिनेट से बाहर किए गए दो मंत्रियों समेत कुछ कांग्रेस विधायकों की नाराजगी सामने आई और अब कांग्रेस कोटे से उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर और पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बीच तल्खी खुलकर सामने आई है। दोनों के बीच इस तल्खी की वजह नए मंत्रियों को विभागों का आवंटन है। बुधवार को कर्नाटक के प्रभारी कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने दोनों के बीच विवाद के निपटारे का फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया है। वेणुगोपाल ने नए मंत्रियों को विभाग आवंटन को लेकर एक बैठक बुलाई थी, लेकिन बैठक में परमेश्वर और सिद्धारमैया के बीच बहस और नोकझोंक को देखते हुए उन्होंने विभाग आवंटन का फैसला राहुल गांधी पर छोड़ दिया है।

बता दें कि 8 नए मंत्रियों ने बीते 22 दिसंबर को मंत्री पद की शपथ ली थी और तब से अपने विभागों का इंतजार कर रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि उन्हें गुरुवार शाम तक विभागों की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को जैसे ही बैठक शुरू हुई सिद्धारमैया ने परमेश्वर को अपने कुछ विभाग नए मंत्रियों को देने की सलाह दी। परमेश्वर के पास गृह, बेंगलुरु डिवेलपमेंट, स्पोर्ट्स और यूथ सर्विसेज समेत कुछ अन्य विभाग भी हैं। बताया जाता है कि परमेश्वर ने इस सलाह पर गहरी आपत्ति जताई। सूत्र के मुताबिक परमेश्वर ने सिद्धारमैया से कहा, ‘आप मेरे मंत्रालयों पर नजरें क्यों गड़ाए हैं। पार्टी हाई कमान ने मुझे ये जिम्मेदारियां सौंपी हैं और मैं किसी को कोई भी मंत्रालय नहीं देने जा रहा।’ इस समय जी परमेश्वर समेत, डीके शिवकुमार, कृष्णा बैरेगौड़ा, यूटी खादर और जमीर अहमद खान के पास एक से ज्यादा विभागों की जिम्मेदारी है। बताया जाता है कि सिद्धारमैया ने जब परमेश्वर को समझाने की कोशिश की तो वह भड़क गए। परमेश्वर ने कहा, ‘आपने जब पूरे पांच साल मुख्यमंत्री पद का आनंद लिया, तो हमने कुछ नहीं कहा था। अब जब मेरे पास तीन मंत्रालय हैं तो आपको दिक्कत हो रही है।’

रिपोर्ट्स के मुताबिक, परमेश्वर ने सिद्धारमैया का समर्थन करने पर केसी वेणुगोपाल को भी निशाने पर लिया। इसके बाद वह बैठक बीच में ही छोड़कर निकल गए। वेणुगोपाल के मुताबिक, अब यह मुद्दा राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बिना नहीं हल हो सकता है। उन्होंने रिपोर्टर्स से बताया, ‘राज्य के कांग्रेस नेताओं के बीच कोई मतभेद नहीं हैं। सभी इस मुद्दे पर एकमत हैं। कांग्रेस अध्यक्ष इस मुद्दे पर आखिरी फैसला लेंगे।’ सिर्फ परमेश्वर ही नहीं, कोई भी अपने अतिरिक्त विभाग छोड़ने को राजी नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, एक नए मंत्री की नजर डीके शिवकुमार और परमेश्वर के एक-एक मंत्रालय पर है, लेकिन कोई भी अपना मंत्रालय छोड़ने को तैयार नहीं है। हालांकि कृष्णा बैरेगौड़ा अपना संसदीय कार्य मंत्रालय देने को तैयार हैं, लेकिन उसे कोई मंत्री लेने को नहीं राजी है।