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मप्रः अब कांग्रेस के तीन विधायकों के भी बगावती तेवर

मप्रः अब कांग्रेस के तीन विधायकों के भी बगावती तेवर, सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा

मध्य प्रदेश में सरकार बनने के दो सप्ताह के भीतर ही कांग्रेस के दो विधायकों एदल सिंह कंषाना और डॉ. हीरा अलावा ने मंत्री नहीं बनाए जाने पर मोर्चा खोल दिया है। कंषाना ने तो सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और एआईसीसी के प्रभारी महासचिव दीपक बाबरिया पर हमला किया है। वहीं डॉ. अलावा ने वादा पूरा न होने पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से समय मांगा है।

उधर, सुवासरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक हरदीप डंग भी मंत्री नहीं बनाए जाने से दुखी हैं। कंषाना और डॉ. अलावा दूसरे दिन भी खुलकर नाराजगी जता रहे हैं। कंषाना ने नईदुनिया से बुधवार को कहा कि सिंधिया और बाबरिया ने उन्हें मंत्री नहीं बनने दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पीसीसी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव को शिकायत की है। मुरैना जिले से कांग्रेस को छह सीटें मिली हैं, लेकिन एक भी मंत्री नहीं बनाया।वहीं, मनावर से विधायक डॉ. अलावा की नाराजगी भी खत्म नहीं हुई है। अलावा ने नईदुनिया से कहा है कि उनसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार में हिस्सेदारी का वादा किया था। अब उन्होंने राहुल गांधी से समय मांगा है।

इधर, मंदसौर संसदीय क्षेत्र से जीते एकमात्र कांग्रेस विधायक हरदीप डंग भी दुखी हैं। उन्होंने नईदुनिया से कहा है कि संसदीय क्षेत्र और जातीय समीकरण के हिसाब से उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना था। वे अपनी बात उचित फोरम पर रखेंगे। केपी सिंह के समर्थक भी आक्रोशित पिछोर विधायक केपी सिंह के समर्थकों ने सोशल मीडिया पर आक्रोश जाहिर किया। समर्थकों ने सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर निशाना साधा। कई स्थानीय पदाधिकारियों ने विरोध करते हुए फेसबुक पर अपने इस्तीफे पोस्ट किए।नई सरकार के मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिलने का मामला दूसरे दिन भी गरमाया रहा। मंगलवार को हाईवे जाम समेत अन्य प्रदर्शन को देखते हुए ग्वालियर जिले में अलर्ट रहा। मुरैना से प्रदर्शनकारी ग्वालियर में प्रवेश न करें इसके लिए मुरैना, भिंड से लगी सीमाओं पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। एक सैकड़ा से अधिक जवान व अफसरों को मुरैना के बानमोर व ग्वालियर के पुरानी छावनी बॉर्डर पर तैनात किया गया। प्रदर्शनकारी सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया निवास पर नहीं पहुंचे, इसके लिए महल के आसपास भी सुरक्षा का खासा इंतजाम किया था।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के एकमात्र विधायक को कमलनाथ सरकार में शामिल नहीं किए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उनके तेवर में कांग्रेस से किनारा करने का स्पष्ट संकेत था। अखिलेश ने कहा, ‘कांग्रेस को धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने हमारे जीते हुए विधायक को मध्य प्रदेश में मंत्री नहीं बनाया। उन्होंने हमारा रास्ता साफ कर दिया है।’ अखिलेश ने कहा कि कांग्रेस ने बहुमत के लिए समर्थन देने के बावजूद ऐसा व्यवहार कर उत्तर प्रदेश में समाजवादियों के लिए रास्ता साफ कर दिया है। 45 वर्षीय अखिलेश के तेवर से उप्र को लेकर कांग्रेस-सपा में तालमेल के आसार कम होते दिख रहे हैं। अखिलेश के बयान के बाद रणनीतिकार मान रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में 2019 के लिए प्रस्तावित महागठबंधन से कांग्रेस को बाहर रखा जाएगा। महागठबंधन की संभावित साझेदार मायावती पहले से ही कांग्रेस को लेकर कड़ा रख अपनाए हुए हैं।

कांग्रेस के व्यवहार से अखिलेश की तल्खी बेवजह नहीं है। कैबिनेट गठन में तवज्जो नहीं मिलने की कसक सपा-बसपा दोनों दलों के नेताओं में दिख रही है। शपथ समारोह का औपचारिक आमंत्रण भी सपा-बसपा कार्यालय अथवा पदाधिकारियों को नहीं भेजे जाने पर नेता बेहद नाराज हैं। सपा के प्रदेश प्रवक्ता यश यादव ने कहा कि सरकार का गठन हो रहा है और इसका आमंत्रण दिए जाने की औपचारिकता भी पूरी नहीं की गई। यह नवगठित सरकार की विफलता है।