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लखनऊ लोकसभा सीट: जानिए क्या है आपके संसदीय सीट का इतिहास

लखनऊ लोकसभा सीट: जानिए क्या है आपके संसदीय सीट का इतिहास, किसका रहा है गढ़

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ लोकसभा सीट पर 1991 से लेकर अब तक बीजेपी का कब्ज़ा रहा है. पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की कर्मभूमि कही जानेवाली लखनऊ संसदीय सीट 1991 में बीजेपी के पाले में आई. तब से लेकर 2014 तक इस सीट पर बीजेपी की जीत लगातार जारी है. अटल बिहारी वाजपेयी इस सीट से लगातार पांच बार चुने गए. उनके राजनीतिक जीवन से सन्यास लेने के बाद 2009 में बीजेपी के टिकट से इस सीट पर लालजी टंडन को जीत मिली.

अस्तित्त्व में आने के बाद से ही यह लोकसभा सीट सामान्य श्रेणी की रही है. यहां हुए पहले तीन आम चुनाव लगातार कांग्रेस ने जीते. 1967 में हुए आमचुनावों में निर्दलीय उम्मीदवार आनंद नारायण ने जीत दर्ज की.  1971 में हुए आमचुनाव में कांग्रेस की शीला कौल और 1977 हेमवती नंदन बहुगुणा भारतीय लोकदल के टिकट पर जीतकर लोकसभा पहुंचे. 1980 में कांग्रेस (इंदिरा) और 1984 में भारतीय राष्ट्रीय  कांग्रेस की टिकट पर शीला कौल ने लगातार दो बार जीत पाई. लखनऊ संसदीय सीट में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं. जिनमें लखनऊ पश्चिम, लखनऊ उत्तरी, लखनऊ पूर्वी, लखनऊ मध्य व लखनऊ कैंट. लखनऊ जिले में आठ ब्लॉक आते है- बक्शी का तालाब, चिनहट, गोसाईंगंज, काकोरी, मॉल, मलीहाबाद, मोहनलालगंज, सरोजिनी नगर.

2014 के लोकसभा चुनाव में राजनाथ सिंह ने यहां से जीत दर्ज की. वे वर्तमान में लखनऊ के सांसद हैं. उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस नेता रीता बहुगुणा जोशी को 2,72,749 मतों से हराया था. हराया था. रीता बहुगुणा जोशी 2017 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ गई थीं. मौजूदा समय में वे योगी सरकार में मंत्री हैं.

लखनऊ सीट का पिछले पांच चुनावों का परिणाम


2009: बीजेपी के लालजी टंडन ने कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी को 40, 901 मतों से पराजित किया था.

2004: अटल बिहारी वाजपेयी ने समाजवादी पार्टी की डॉ मधु गुप्ता को 2,18,375 वोटों से हराया था.

1999: अटल बिहारी वाजपेयी ने कांग्रेस के डॉ कर्ण सिंह को 1,23,624 मतों से हराया था.

1996: अटल बिहारी वाजपेयी ने सपा के राजबब्बर को 1,18,671 मतों से पराजित किया था.

1998: अटल बिहारी वाजपेयी ने समाजवादी पार्टी के मुजफ्फर अली को 2,16,263 वोटों से हराया था.

2011 की जनगणना के मुताबिक लखनऊ जिले की आबादी 45.89 लाख है जिनमे पुरुषों की आबादी 23.94 लाख और महिलाओं की आबादी 21.95 लाख है 2011 की जनगणना के अनुसार लखनऊ की कुल आबादी की 71.1 प्रतिशत जनसंख्या हिन्दुओं की है. इसके बाद 26.36 प्रतिशत मुस्लिम हैं. इसके बाद बाकी अन्य हैं. अनुसूचित जाति की आबादी 14.3% हैं तो अनुसूचित जनजाति की 0.2%. इसी तरह ब्राह्मण, राजपूत वोटर भी मिलकर करीब 18 प्रतिशत हैं. ओबीसी मतदाता 28 फीसदी और मुस्लिम मतदाता करीब 18 फ़ीसदी हैं.

चुनाव आयोग की 2009 की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ में 16.53 लाख मतदाता है जिनमे महिला मतदाताओं की संख्या 7.63 लाख और पुरुष मतदाताओं की संख्या 8.89 लाख है.वैसे तो लोकसभा चुनाव देश के मुद्दे पर लड़ा जाता है लेकिन्स्थानिया मुद्दों का भी महत्व होता है. 2014 में विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ा गया था. लेकिन लखनऊ का मुद्दा था रोजाना का लगने वाला जाम, सुरक्षा, सड़क, बिजली पानी, अनियमित कॉलोनियों का नियमितीकरण आदि.

हालांकि जाम से निजात दिलाने के लिए सांसद राजनाथ सिंह ने किसान पथ का शिलान्यास किया था, जो अब अगले साल तक पूरा हो जाएगा. इसकी वजह से रिंग रोड पर लगने वाला जाम ख़त्म होगा. इसके अलावा कई फ्लाईओवर को मंजूरी दी गई है, जिस पर काम शुरू होना है. शहर को स्वच्छ बनाने के लिए भी कई कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. गोमती नदी के सफाई का मुद्दा भी अहम है. स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने के लिए मॉडर्न ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी काम हो रहा है.