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देश लौटकर बोले हामिद अंसारी, ‘वो लड़की मेरी जिंदगी का Closed chapter’

पाकिस्तान से लौटने पर अपनी मां के गले मिलते हामिद अंसारी (फोटो-PTI)

33 साल के हामिद अंसारी की तुलना सोशल मीडिया पर लोग फिल्म वीरजारा के शाहरूख खान से कर रहे हैं, जो अपने प्यार के लिए पाकिस्तान पहुंच जाता है. पाकिस्तान में उसे जासूस होने का आरोप लगाकर जेल में कैद कर दिया जाता है. फिल्म में शाहरूख खान को जेल से बाहर आने में बीसियों साल लग जाते हैं.  हामिद अंसारी की वतन वापसी 6 साल बाद हो गई. हामिद को लगता है कि उसने दिमाग से नहीं दिल से पाकिस्तान जाने का फैसला लिया था. इस गलती की उसे बहुत बड़ी सजा भुगतनी पड़ गई. अब वो नौकरी ढूंढकर शादी करना चाहता है, सैटल होना चाहता है. उसका कहना है कि अब वो लड़की मेरी जिंदगी का ‘Closed chapter’ है.27 साल का हामिद मुंबई में साफ्टवेयर इंजीनियर था. साल 2012 में फेसबुक पर उसकी एक पाकिस्तानी लड़की सबा से दोस्ती हुई. दोनों के अंदर एक दूसरे के लिए फीलिंग्स डेवलप हुए. लड़की के घरवाले उसकी शादी कहीं और करना चाहते थे. इसके लिए वो तैयार नहीं थी. वो हामिद से शादी करना चाहती थी और उसने हामिद से मदद मांगी. हामिद को लगा कि उसे लड़की की मदद करनी चाहिए. हामिद ने वीजा के लिए पाकिस्तानी हाईकमीशन में अर्जी दी, मगर वहां समय लगा रहा था. उधर लड़की की शादी की तारीखें नजदीक आ रहीं थी. ऐसे में हामिद की मदद करने एक पाकिस्तानी दोस्त आया, इससे भी हामिद की दोस्ती ऑनलाइन हुई थी. उसने हामिद को सलाह दी कि वो अफगानिस्तान के रास्ते पाकिस्तान में घुसे. हामिद उस समय भावनाओं में बहुत बहा हुआ था. उसने दोस्त की बात मान ली और अफगानिस्तान से पेशावर पहुंच गया. हामिद के मुताबिक इसी दोस्त ने उसकी पीठ में छुरा घोंप दिया. हामिद को उसने फेक आईडी दी और फिर पाकिस्तानी एजेंसियों को खबर करके हामिद को पकड़वा दिया. फिर उसके साथ शुरू हुआ टार्चर का सिलसिला. वो तो भला हो कि उस पाकिस्तानी लड़की ने गवाही दी कि हामिद उससे फेसबुक पर मिला था और उसके लिए पाकिस्तान आया था, इसलिए हामिद पर सिर्फ फेक आईडी रखने का केस चला. वरना केस जासूसी का भी हो सकता था और हामिद की वतन वापसी कब होती कहना मुश्किल हो जाता.

पाकिस्तान में हामिद को अच्छे बुरे दोनों लोग मिले. अनवर काजी औऱ रक्षंदा खान ने जिन्होंने कोर्ट में ये साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि हामिद जासूसी करने पाकिस्तान नहीं आया था. पाकिस्तान की मीडिया ने हामिद अंसारी के परिवार की बहुत मदद की. पहले उन्होंने खुद तथ्यों की जांच की. जब हामिद का पक्ष सही लगा तो मीडिया मजबूती के साथ हामिद के साथ खड़ी हुई.हामिद को पाकिस्तान में तीन साल अंडरग्राउंड जेल में अकेले रखा गया. उसे ये पता नहीं चलता था कि कब दिन हुआ कब रात हुई. 24 घंटे में हामिद को सिर्फ एक बार एक मिनट के लिए वॉश रुम ले जाया जाता था. कई बार कई दिनों तक उसे खाना नहीं मिलता था. गर्मियों में उसके नहाने पर पांबदी लगा दी जाती थी. उसके शरीर में कीड़े पड़ जाते थे.तीन साल की सुनवाई के बाद पाकिस्तानी मिलिट्री कोर्ट ने हामिद को साल 2015 में 3 साल की सजा सुनाई. तब तक पाकिस्तान ने माना ही नहीं था कि कोई भारतीय नागरिक उनके पास है. हामिद के वकीलों ने अपील कि वो तीन साल पहले ही जेल में काट चुका है, इसलिए उसे फिर से जेल में नहीं रखा जाए. लेकिन मिलिट्री कोर्ट ने ये बात नहीं मानी और कहा कि वो तब एक अंडरट्रायल के तौर पर रहा था. इस तरह 2018 तक हामिद अंसारी को जेल की सजा मिलिट्री कोर्ट ने सुनाई. हामिद की सजा पूरी हो रही थी, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन की तरफ से उसकी रिहाई के कोई संकेत नहीं दिख रहे थे. हामिद के वकीलों ने पेशावर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तब जाकर हामिद की रिहाई का रास्ता साफ हुआ.