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पाकिस्‍तान पर बरसे पूर्व राजदूत, बोले- ‘यह बस नाम का लोकतंत्र, वास्‍तविकता में नहीं’

husain haqqani

वाशिंगटन : पाकिस्‍तान लोकतांत्रिक आवाजों को कुचलने के आरोपों के बीच पूर्व राजनयिक हुसैन हक्‍कानी ने देश में प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाए हैं। अमेरिका में पाकिस्‍तान के राजदूत रह चुके हक्‍कानी ने कहा कि इस्‍लामाबद में बस नाम का लोकतंत्र है, वास्‍तव में नहीं। उन्‍होंने पाकिस्‍तान पर बलूच, सिंधी और अन्‍य समुदाय के लोगों की आवाज कुचलने तथा उनकी पहचान मिटाने की कोशिश का आरोप लगाया।

हक्‍कानी ‘पाकिस्‍तान में लोकतंत्र, मानवाधिकार और आतंकवाद के खात्‍मे’ पर आयोजित एक कॉन्‍फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्‍होंने कड़े लहजे में कहा, ‘पाकिस्‍तान में केवल नाम का लोकतंत्र है, वास्तव में नहीं।’ इस दौरान उन्‍होंने पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों को लगातार मिल रही धमकियों और देश में मानवाधिकारों की खराब स्थिति को लेकर चिंता जताई। उन्‍होंने कहा, ‘पाकिस्‍तान में सिंधी और बलूच भाषाई प्रांतों में रहने वाले लोग दमन के शिकार हैं। देश में एकरूपता लाने के नाम पर उनकी संस्‍कृति और भाषाओं को खत्‍म करने की कोशिश की जा रही है।’पूर्व राजनियक ने पाकिस्‍तान को चेताया कि कोई भी देश विविधता को खत्‍म कर मजबूत नहीं बन सकता, बल्कि इन्‍हें अपनाकर ही वह ताकतवर हो सकता है। इस कॉन्‍फ्रेंस में मुंबई हमलों के मास्‍टरमाइंड हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा और तहरीक-ए-लबेक जैसे चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की भी उठी। हक्कानी ने कहा कि पाकिस्‍तान के लोगों की इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। पेशावर के सैनिक स्‍कूल में 16 दिसंबर, 2014 को हुए हमले का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा, ‘हम ऐसा देश चाहते हैं, जहां बच्‍चे बिना किसी खौफ के पूरी सुरक्षा के साथ स्‍कूल में पढ़ाई के लिए जा सकें।’