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अगर नहीं करते नोटबंदी तो 2 फीसदी ज्यादा होती GDP: गीता गोपीनाथ

अगर नहीं करते नोटबंदी तो 2 फीसदी ज्यादा होती GDP: गीता गोपीनाथ

नोटबंदी पर चार अर्थशास्त्रियों ने हाल ही में यूएस नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च (एनबीआर) में एक रिसर्च पेपर प्रकाशित किया है. इन चार अर्थशास्त्रियों में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के गेब्रियल चोडोरो-राइक और गीता गोपीनाथ (आईएमएफ की चीफ इकोनॉमिस्ट), गोल्डमैन सैक्स की प्राची मिश्रा और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अभिनव नारायणन के नाम शामिल हैं.

इन अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, नवंबर और दिसंबर 2016 में आर्थिक गतिविधि और रोजगार में तीन प्रतिशत की कमी आई है. जिससे तिमाही वृद्धि दर में 2 प्रतिशत या उससे अधिक की गिरावट हुई है.

अगर नोटबंदी नहीं हुई होती, तो सितंबर-दिसंबर 2016 की तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 2 प्रतिशत अधिक होता. रिसर्च के मुताबिक, इंफॉरमल सेक्टर में जीडीपी के राष्ट्रीय आंकड़े को बहुत सीमित कवरेज मिल है.

इन अर्थशास्त्रियों के अनुसार उनके परिणाम 2016 के अंत में आर्थिक गतिविधि में पूर्ण गिरावट की संभावना के संकेत दे रहे हैं. स्टडी ने अधिक गंभीर झटके का सामना करने वाले क्षेत्रों में आर्थिक तेजी और सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संकुचनों की भी पहचान की.


बता दें कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (IMF) ने भारत में जन्मीं अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ को चीफ इकॉनमिस्ट नियुक्त किया है. गीता गोपीनाथ फिलहाल हार्वर्ड विश्विद्यालय में प्रोफेसर हैं. आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टीन लेगार्ड ने कहा था, ‘गोपीनाथ दुनिया की बेहतरीन अर्थशास्त्रियों में से एक है. उनके पास उम्दा शैक्षणिक योग्यता के साथ व्यापक अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी है.’

गीता गोपीनाथ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीए और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से एमए की डिग्री हासिल की. उसके बाद उन्होंने अर्थशास्त्र में पीएचडी की डिग्री प्रिंसटन विश्विद्यालय से 2001 में प्राप्त की. इसके बाद उसी साल उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर काम शुरू कर दिया. वर्ष 2005 से वह हार्वर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ा रही हैं.