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डोकलाम के मद्देनजर सरकार को सतर्क रहने की नसीहत, चीन की गतिविधियां बढ़ीं

डोकलाम

विदेश मामलों की संसदीय समिति ने डोकलाम के आसपास चीन की गतिविधियों को देखते हुए भारत सरकार से लगातार भूटान के संपर्क में रहने को कहा हे। सोमवार को संसद में पेश हुई रिपोर्ट में समिति ने चीन सीमा पर सड़कों की संरचना को लेकर असंतोष जताते हुए सरकार से स्थिति सुधारने को कहा है।

समिति ने डोकलाम सहित भारत-चीन संबंधों से जुड़े जटिल मुद्दों पर अपनी सिफारिश सरकार को दी है। मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने में चीन सरकार के रोड़े को देखते हुए समिति ने कहा है कि भारत को भी चीन में मानवाधिकार से जुड़े मामलों को उठाना चाहिए। हालांकि डोकलाम मुद्दे का बिना खून खराबे के समाधान को समिति ने सराहा है।

समिति को सरकार की ओर से बताया गया है कि डोकलाम इलाके में पहली बार घुसपैठ की घटना नहीं हुई। लेकिन इस बार मामला जटिल इसलिए हुआ क्योंकि चीनी सेना ने वहां सड़क निर्माण करने का प्रयास किया। इस प्रयास का पहले भूटानी गश्ती दल ने विरोध किया। लेकिन चीनी सैनिकों ने उन्हें खदेड़ दिया। इसके बाद भारतीय सैनिकों का चीनी सैनिकों से टकराव हुआ। भारत-चीन सीमा पर अन्य जगहों पर बार-बार घुसपैठ के बारे में पूछे जाने पर समिति को बताया गया कि दोनों देशों के बीच वास्तविक सीमा का निर्धारण न होने की वजह से ऐसा बार-बार होता है।

भारत-चीन सीमा पर सीमा सड़क अवसंरचना अपर्याप्त होने पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए संसद की एक समिति ने कहा है कि चीन से लगी सीमा सहित सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क आधारभूत ढांचा एवं परिवहन सुविधा तैयार की जाए। संसदीय समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल ही में डोकलाम संकट की स्थिति के संबंध में समिति की यह दृढ़ राय है कि सरकार सीमा सड़कों को दी जाने वाली प्राथमिकता के स्तर को बढ़ाए। भारत-चीन सीमावर्ती क्षेत्रों के दौरे के दौरान समिति को सीमा के दोनों ओर विकसित की गई अवसंरचना की तस्वीरें दिखाई गई और इसमें बड़ी खामियां स्पष्ट रूप से दिखाई दी । रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह जानकर क्षुब्ध है कि भारत-चीन सीमा पर सीमा सड़क अपर्याप्त है। वास्तव में अनेक महत्वपूर्ण भागों में हम एकल पहुंच मार्ग पर निर्भर हैं जो संघर्ष की स्थिति में एक जोखिम है जिससे निपटना मुश्किल है । रिपोर्ट में कहा गया है कि बदतर स्थिति यह है कि सैन्य यातायात को सह सकने वाली सड़कें भी नहीं बनाई गई हैं। 1962 की लड़ाई में चीन ने इस विशेष स्थिति का फायदा उठाया था और ऐसे में हमें इस मुद्दे पर विगत से सबक सीखना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति महसूस करती है कि भारत को इस संबंध में काफी कुछ करने की जरूरत है। समिति चाहती है कि सीमा पर भारत की सशक्त उपस्थिति, पर्यावास एवं परिवहन के लिये बेहतर अवसंरचना सृजित की जाए ताकि हमारे सशस्त्र बलों को आवास, आवागमन और भंडारण तथा आपात स्थिति में हथियार एवं गोला बारूद की ढुलाई में कोई कठिनाई न हो।