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बीजेपी-जेडीयू पर बरसे उपेंद्र कुशवाहा, बोले, ‘फिर सत्ता में नहीं लौटेंगे मोदी-नीतीश’

पूर्व केंद्रीय मंत्री और आरएलएसपीप्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी केंद्र में और 2020 के विधानसभा चुनाव में नीतीश बिहार में सत्ता में फिर से नहीं आ पाएंगे। पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल में एनसीपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदय सम्राट सहित अन्य के आरएलएसपी में शामिल होने के अवसर पर अपने संबोधन में बोलते हुए कुशवाहा ने ये बातें कहीं। कुशवाहा ने कहा कि 2014 में जब बीजेपी ने अपना पीएम उम्मीदवार भी नहीं चुना था उसी वक्त उन्होंने कहा था कि मोदी को देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए। कुशवाहा केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद पहली बार पटना पहुंचे थे। उन्होंने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार ने कभी बिहार की अस्मिता का प्रश्न उठाकर यहां के लोगों का नाखुन और बाल डीएनए जांच के लिए पीएमओ भेजा था। अब वही बीजेपी के साथ चले गए।’ कुशवाहा ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि आपको मिट्टी में मिल जाने की चिंता नहीं पर बिहार की जनता आपको मिट्टी में जरूर मिला देगी। बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कुशवाहा बोले कि जब चुनाव नजदीक आता है तब बीजेपी को राम मंदिर निर्माण की याद आती है। कुशवाहा ने कहा कि बिहार की जनता ने मन बना लिया है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बिहार की सभी 40 सीटों पर इनका खाता भी नहीं खुलने वाला है। उन्होंने बताया कि बिहार की नीतीश कुमार सरकार से प्रदेश को और केंद्र की एनडीए सरकार से देश को मुक्ति दिलाने तथा शिक्षा के क्षेत्र में सुधार को लेकर अपनी 25 सूत्री मांग को लेकर आगामी 2 फरवरी को आरएलएसपी पटना में आक्रोश मार्च निकालेगी तथा मुख्यमंत्री और बिहार विधानमंडल का घेराव करेगी। इस दौरान उन्होंने महागठबंधन से जुड़े सवालों के जवाब भी दिए। कांग्रेस नेता अहमद पटेल से मुलाकात को लेकर सवाल पूछे जाने पर कुशवाहा ने कुछ भी खुलासा करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मीडिया सहित अन्य लोग जो भी मतलब निकालें उसके लिए वे स्वतंत्र हैं। कुशवाहा से बिहार में आरजेडी, कांग्रेस और एचएएम सेक्युलर पार्टी के महागठबंधन में शामिल होने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है। विकल्प हमारे सामने कई हैं । उन विकल्पों से एक विकल्प महागठबंधन का भी है लेकिन हमें करना क्या है, इस बारे में अभी निर्णय अंतिम रूप से नहीं लिया है।