देश होम

1971 विजय दिवस: कैसे एक भारतीय जांबाज से हारी थी कश्मीर कब्जा करने आई पाक की सेना

1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में 95000 पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था। इसी के साथ बांग्लादेश बना। इस युद्ध में सेकेण्ड लेफ्टिनेन्ट अरुण खेत्रपाल ने उच्चतम वीरता और साहस का परिचय दिया था।

1971 का भारत पाक युद्ध

दरअसल पाकिस्तान की योजना कश्मीर पर कब्जा करने की थी। इसके लिए उसने बड़ी संख्या में सियालकोट सेक्टर में अपनी फौज को तैनात कर दिया और शकरगढ़ सेक्टर में बसंतर नदी (सांबा) से टैंकों के जरिये हमला बोल कर जम्मू-कश्मीर को पंजाब से अलग-थलग करना चाहता था। 15 दिसंबर को अरुण खेत्रपाल एक आर्म्ड स्क्वार्डन की कमान संभाल रहे थे। इसी दौरान एक-दूसरे स्क्वार्डन को दुश्मन की सेना का सामना करने के लिए मदद की जरूरत पड़ी और उन्हें मदद के लिए ब्रिगेड मुख्यालय जरपाल पहुंचने का संदेश मिला। रास्ते में लैंडमाइंस बिछी थी, जिनको हटाने के लिए कुछ और दिन लगने थे। दुश्मन की तरफ से गोलाबारी भी जारी थी। इन सब बाधाओं की परवाह किए बगैर वे पूना हॉर्स की स्क्वार्डन लेकर 16 दिसंबर की सुबह जरपाल पहुंच गए। दुश्मन के कुछ टैंकों को तबाह करते हुए उन्हें खदेड़ने में कामयाब रहे। वे सेंचुरियन टैंक पर सवार थे। दो अन्य अफसर भी दस्ते में थे, जो अलग-अलग टैंकों पर थे। कुछ घंटों के बाद दुश्मन ने बड़ी संख्या में पैटन टैंक के डिवीजन के रूप मेें दूसरा जोरदार हमला किया।इस हमले का सामना खेत्रपाल ने बड़ी चतुरता और वीरता से अपने थोड़े से टैंकों के साथ पूरे दिन किया। वह दुश्मन के टैंकों को भगा-भगा कर छकाते रहे और एक-एक कर तबाह करते रहे। इस दौरान उन्होंने दुश्मन के दस टैंक बर्बाद कर दिए।