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कभी पिता ने फूंका था सोनिया के खिलाफ बिगुल,आज पुत्र ने दिखाया राहुल को दम

कभी पिता ने फूंका था सोनिया के खिलाफ बिगुल,आज पुत्र ने दिखाया राहुल को दम

समय खुद को दोहराता है। राजस्थान के मुख्यमंत्री पद के लिए दो दिनों तक सचिन पायलट का डटे रहना यही साबित करता है। अंत में उप मुख्यमंत्री का पद लेकर ही वह माने।18 साल पहले सन 2000 में सचिन के पिता राजेश पायलट कांग्रेस के बड़े नेता हुआ करते थे। उन्होंने अपना कद इतना ऊंचा कर लिया था कि हाईकमान के सामने भी झुकते नहीं थे। अपने तेवर तो उन्होंने तभी दिखा दिए थे जब सीताराम केसरी के सामने कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा।

उस समय शरद पवार ने भी कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ा था लेकिन दोनों नेता सीताराम केसरी से चुनाव हार गए। आगे चलकर पार्टी की बागडोर सोनिया गांधी के हाथ में आई तो शरद पवार ने बगावत की और पार्टी छोड़ने को मजबूर हुए। सन 2000 में कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए सोनिया गांधी चुनाव लड़ी और उनके खिलाफ जो लोग झंडा उठाए थे वे थे कांग्रेस नेता जतिन प्रसाद के पिता जीतेंद्र प्रसाद और सचिन के पिता राजेश पायलट। जीतेंद्र प्रसाद जब सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे तो पायलट ने उनके समर्थन में रैलियां की थीं। जीतेंद्र प्रसाद वह चुनाव हार गए थे।आज 18 साल बाद राजेश पायलट के तेवर उनके पुत्र सचिन में देखने को मिले। राजस्थान में जब कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनने का मौका आया तो सचिन ने सोनिया के बेटे राहुल गांधी के सामने अपना दावा पेश किया। राहुल पसोपेश में फंस गए कि सचिन से कहीं वरिष्ठ अशोक गहलौत की उपेक्षा कर सचिन को कैसे मुख्यमंत्री का पद सौंपा जाए। सोनिया गांधी को दखल देना पड़ा। दो दिन तक चले कई दौर की बातचीत के बाद सचिन उप मुख्यमंत्री का पद लेकर माने।