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अरेस्ट करने पर हुआ बवाल तो छोड़ दिया, इंस्पेक्टर बोले- कोतवाली घुमाने लाए थे : यूपी

एक तरफ पुलिस गैर-जमानती वॉरंट वालों को अभियान चलाकर गिरफ्तार करने का दावा करती है, तो दूसरी ओर हजरतगंज पुलिस एनबीडब्ल्यू में पकड़े गए दो कर्मचारी नेताओं को गिरफ्तार कर हवालात से रिहा कर दिया। उनकी रिहाई कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए की गई, जबकि इंस्पेक्टर राधारमण सिंह का कहना है कि दोनों को कोतवाली भ्रमण करवाने लाया गया था, गिरफ्तारी का तो कोई सवाल ही नहीं उठता है। सेतु निगम कर्मचारी महासंघ के नेता इशरत जहां और पूर्व नेता पीसी कुरील वर्ष 1999 में पांचवें वेतनमान की मांग को लेकर हजरतगंज में प्रदर्शन किया था। इसमें हंगामा और बवाल होने पर उस वक्त हजरतगंज पुलिस ने दोनों नेताओं के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। 19 साल बाद इस मुकदमे में कोर्ट ने दोनों कर्मचारी इशरत जहां और पीसी कुरील के खिलाफ सोमवार को गैर-जमानती वॉरंट जारी कर दिया था।

कोर्ट के आदेश को तामील करवाने पुलिस ने गुरुवार को दोनों नेताओं को कोतवाली पर बातचीत के लिए बुलाया। दोनों कर्मचारियों के कोतवाली पहुंचते ही उन्हें हिरासत में लेकर हवालात में बैठा दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई की सूचना जैसे ही कर्मचारी असोसिएशन के नेताओं को मिली उनका कोतवाली परिसर में जमवाड़ा लगना शुरू हो गया। जवाहर भवन और इंदिरा भवन के कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष सतीश पांडेय अपने समर्थकों के साथ हवालात के बाहर पहुंच गए। उनके साथ असोसिएशन के महामंत्री सुशील कुमार बच्चा भी मौजूद रहे।

कर्मचारियों की भीड़ देख पुलिसकर्मियों ने मामले की जानकारी आलाधिकारियों को दी। इसके कुछ घंटे बाद एक एएसपी स्तर के अधिकारी के हस्तक्षेप के बाद दोनों कर्मचारियों को रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई को लेकर इंस्पेक्टर राधारमण सिंह का कहना है कि पकड़े गए दोनों कर्मचारियों को कोतवाली दिखाने के लिए लाया गया था। प्रदर्शन और हंगामे का तो कोई सवाल ही नहीं उठता है। वहीं, इस मामले में सभी बड़े अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।