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DSP जिया-उल-हक हत्याकांड से मिलती-जुलती है बुलंदशहर हिंसा

जानिए कुंडा में DSP जिया-उल-हक हत्याकांड से कितनी मिलती-जुलती है बुलंदशहर हिंसा

बुलंदशहर हिंसा के बाद से उत्तर प्रदेश ​की सियासत में भूचाल मचा है. इंस्पेक्टर सुबोध ​कुमार सिंह की मौत के बाद से उसके परिजनों सहित आईपीएस एसोसिएशन ने भीड़तंत्र पर गंभीर सवाल उठाए हैं. विपक्षी दल लगातार बीजेपी सरकार पर हमलावर हैं. मामले में सत्ता विहिप, बजरंग दल के साथ बीजेपी के कार्यकर्ताओं के नाम सामने आने से सरकार पूरी तरह बैकफुट पर है.

उधर इस घटना ने एक बार फिर से 2013 में कुंडा में डीएसपी जिया उल हक हत्याकांड की यादें ताजा कर दी हैं. उस घटना ने भी तत्कालीन अखिलेश सरकार को ऐसे ही हिलाकर रख दिया था. उस समय भी भीड़तंत्र और सत्ता से अपराधियों के गठजोड़ की बात सामने आई थी. इसमें एक मंत्री को इस्तीफा तक देना पड़ गया था. मामले की जांच अभी भी सीबीआई कर रही है.

दरअसल प्रतापगढ़ के कुंडा में डीएसपी जिया-उल-हक़ हत्याकांड और बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के कई तथ्य मिलते जुलते हैं.कुंडा के बलीपुर गांव में 2 मार्च 2013 को शाम साढ़े सात बजे प्रधान नन्हे सिंह यादव की उस समय हत्या कर दी गई, जब वह विवादित जमीन के सामने बनी एक फूस की झोपड़ी में मजदूरों से बात कर रहे थे. हत्यारे दो बाइक पर सवार थे.

घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में समर्थक हथियार लेकर बलीपुर गांव में उनके घर जुटने लगे. रात सवा आठ बजे ग्रामीणों ने कामता पाल के घर में आग लगा दी. इसी समय सीओ जियाउल हक गांव में पीछे के रास्ते से प्रधान के घर की तरफ बढ़े, लेकिन ग्रामीणों द्वारा की जा रही फायरिंग से डरकर सीओ की सुरक्षा में लगे गनर इमरान और एसएसआइ कुंडा विनय कुमार सिंह खेत में छिप गए.

कुंडा के कोतवाल सर्वेश मिश्र भी आक्रोशित ग्रामीणों से घबराकर नन्हे सिंह के घर की तरफ जाने की हिम्मत न जुटा सके. रात साढ़े आठ बजे प्रधान के छोटे भाई 38 वर्षीय सुरेश यादव की हत्या कर दी गई. रात 11 बजे भारी पुलिस बल बलीपुर गांव पहुंचा और सीओ की तलाश शुरू हुई. आधे घंटा बाद जियाउल हक का शव प्रधान के घर के पीछे खड़ंजे पर पड़ा मिला.बलीपुर में नन्हे सिंह के छोटे भाई सुरेश और तत्कालीन सीओ, कुंडा जिया उल हक की भी हत्या हुई. इससे पैदा हुए संदेह से उठी साजिश की बू ने कहीं-न-कहीं राजा भैया को भी घेर लिया.उधर बुलंदशहर में सोमवार को गोकशी के शक में लोगों ने जमकर हंगामा किया. यहां गुस्साए लोगों ने चिंगरावठी चौराहे पर हंगामा करते हुए पुलिस पर पथराव और फायरिंग कर दी. जिसमें एक इंस्पेक्टर और एक युवक की मौत हो गई. इस दौरान उपद्रवियों ने कई वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी भी की.

स्याना स्थित एक गांव के खेत में कथित रूप से गोकशी होने की खबर मिलने के बाद गुस्साए लोगों ने वहां जाम लगा दिया. वहीं पुलिस जब जाम हटाने पहुंची तो भीड़ के साथ संघर्ष शुरू हो गया. ऐसे में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए गोली चला दी, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया. इसके बाद भीड़ भी भड़क गई और उसने चौकी पर हमला कर दिया.

इस दौरान भीड़ में मौजूद कुछ अराजकतत्वों ने पुलिस के एक वाहन में आग लगा दी और पुलिसकर्मियों पर फायरिंग कर दी. इस फायरिंग में स्याना कोतवाली के प्रभारी सुबोध कुमार सिंह की गोली लगने से मौत हो गई. वहीं पथराव में एक इंस्पेक्टर सहित कई पुलिसकर्मी घायल हुए. वहीं एक अन्य युवक की गोली लगने से मौत हो गई.डीएसपी जिया उल हक की हत्या के बाद तथ्य सामने आया कि वह कुंडा में अस्थान गांव में भड़की हिंसा की जांच कर रहे थे. इसके अलावा कुछ और अहम जांचें उनके पास बताई गईं. दरअसल 2012 में अखिलेश यादव की ताजपोशी के कुछ महीने बाद ही जून मेें कुंडा के अस्थान गांव में में एक दलित किशोरी के साथ गैंगरेप की घटना हुई. इस दौरान हिंसा भड़क उठी और भीड़ ने गांव में मुस्लिम समुदाय के 50 से ज्यादा मकानों को आग के हवाले कर दिया. उस समय आरोप लगा कि कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के आदमियों ने ही इस घटना को अंजाम दिया. इस मामले में सियासत भी खूब हुई.उधर बुलंदशहर में मारे गए इंस्पेक्टर सुबोध कुमार राठौर का 2015 में दादरी में बिसाहड़ा के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग के शिकार अखलाक हत्याकांड से गहरा नाता रहा. बिसाहड़ा में बीफ के शक में अखलाक की 28 सितंबर 2015 की रात पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 18 लोगों को आरोपी बनाया गया था. मोहम्मद अखलाक जब मॉब लिचिंग का शिकार हुए थे, उस दौरान सुबोध वहां के थाने में तैनात थे. जानकारी के अनुसार सुबोध कुमार सिंह ही अपनी जीप में घायल अखलाक को अस्पताल लेकर गए थे और वो इस केस में पहले जांच अधिकारी थे.

मृतक सुबोध कुमार सिंह की बहन सुनीता सिंह कहती हैं, ‘सुबोध कुमार अखलाक हत्याकांड की जांच कर रहे थे. इसी वजह से उनकी हत्या हुई. यह पुलिस की साजिश है.’कुंडा मामले में डीएसपी जिया उल हक की पत्नी परवीन आजाद ने सीधे-सीधे तत्कालीन सपा सरकार में मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया पर हत्या की ​साजिश रचने का आरोप लगाया. मामले ने इतना तूल पकड़ा कि आखिरकार राजा भैया ने मंत्री पद से इस्तीफा दिया तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मामले को सीबीआई के हवाले कर दिया.

इधर बुलंदशहर हिंसा में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में स्याना कोतवाली के सब इंस्पेक्टर सुभाष सिंह ने रिपोर्ट दर्ज कराई है, जिसमें बजरंग दल के जिला संयोजक योगेश राज, बीजेपी युवा स्याना के नगर अध्यक्ष शिखर अग्रवाल, वीएचपी कार्यकर्ता उपेंद्र राघव को भी किया नामजद किया है.बुलंदशहर हिंसा मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं. इनमें से एक एफआईआर इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में दर्ज की गई है, जिसमें कुल 28 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 60 अज्ञात लोग शामिल हैं. सुबोध कुमार की हत्या के मामले में बजरंग दल के नेता योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया गया है. बताया जा रहा है कि उसी ने सबसे पहले गोकशी की शिकायत की थी.

वहीं, दूसरी एफआईआर गोकशी के मामले में दर्ज की गई है, जिसमें 7 लोगों के नाम हैं. इस मामले की जांच एसआईटी और एडीजी इंटेलिजेंस कर रहे हैं. आरोपियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की छह टीमों ने अब तक 22 ठिकानों पर छापेमारी की हैं.

वहीं कुंडा मामले की बात करें तो यहां सीओ जिया उल हक हत्याकांड में दो अलग-अलग मुकदमे सामने आए. घटना के अगले दिन 3 मार्च को दिवंगत सीओ की हत्या में एसओ, हथिगवां मनोज शुक्ल ने जो एफआइआर दर्ज कराई, उसमें नन्हे यादव के परिवार के 4 लोगों समेत कुल 10 को नामजद किया गया. वहीं सीओ की पत्नी परवीन आजाद की तहरीर पर पुलिस ने राजा भैया पर साजिश रचने और उनके प्रतिनिधि हरिओम शंकर श्रीवास्तव, कुंडा जिला पंचायत अध्यक्ष गुलशन यादव, रोहित सिंह और गुड्डू सिंह पर लूट, बलवा और हत्या का अलग से मुकदमा दर्ज किया.