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इस दौरे पर टेस्ट सीरीज में भारत व ऑस्ट्रेलिया की तरफ से दो-दो कप्तानों ने की थी कप्तानी

इस दौरे पर टेस्ट सीरीज में भारत व ऑस्ट्रेलिया की तरफ से दो-दो कप्तानों ने की थी कप्तानी

भारतीय क्रिकेट टीम महेंद्र सिंह धौनी की कप्तानी में 2011-12 में चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने ऑस्ट्रेलिया गई थी। हालांकि, चौथे टेस्ट में धौनी नहीं खेले थे और उनकी जगह वीरेंद्र सहवाग ने कप्तानी की थी। भारत के लिए यह सीरीज पूरी तरह से निराशाजनक साबित हुई। माइकल क्लार्क की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलियाई टीम ने यह सीरीज 4-0 से अपने नाम की। ऑस्ट्रेलिया ने मेलबर्न में पहला टेस्ट 122 रन से, सिडनी में दूसरा टेस्ट पारी और 68 रन से, पर्थ में तीसरा टेस्ट पारी और 37 रन से एवं एडिलेड में चौथा टेस्ट 298 रन से जीता। एडिलेड में हुआ सीरीज का आखिरी टेस्ट राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण के करियर का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ। इस सीरीज के बाद इन दोनों ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी।ऑस्ट्रेलियाई कप्तान क्लार्क ने सिडनी टेस्ट में 329 रन की पारी खेलकर अपने करियर का सर्वाधिक स्कोर बनाया। क्लार्क का यह तिहरा शतक खास था, क्योंकि टेस्ट क्रिकेट में लगाया गया यह 25वां तिहरा शतक था। साथ ही क्लार्क भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट क्रिकेट में तिहरा शतक जड़ने वाले पहले बल्लेबाज बने थे।र्थ टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर ने 159 गेंदों पर 180 रन की तूफानी पारी खेली। इस दौरान उन्होंने सिर्फ 69 गेंदों पर शतक पूरा किया, जो टेस्ट क्रिकेट में किसी भी सलामी बल्लेबाज का सबसे कम गेंदों पर जड़ा गया शतक था।एडिलेड टेस्ट में क्लार्क (210) और रिकी पोंटिंग (221) ने चौथे विकेट के लिए 386 रन की साझेदारी की। यह दोनों देशों के बीच किसी भी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड है।बल्लेबाजी हो या गेंदबाजी, यह सीरीज पूरी तरह से ऑस्ट्रेलिया के दबदबे वाली साबित हुई। सीरीज में सबसे ज्यादा रन क्लार्क (626) ने बनाए, जबकि पोंटिंग (544) ने भी जमकर रन बटोरे। भारत की ओर से सबसे ज्यादा रन विराट कोहली (300) ने बनाए। सीरीज में सात शतक लगे, जिनमें से छह ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों ने लगाए। भारत की ओर से एकमात्र शतक कोहली ने लगाया। विकेट लेने के मामले में बेन हिलफेनहॉस (27) सबसे आगे रहे, जबकि पीटर सिडल (23) ने भी उन्हें कड़ी टक्कर दी। भारत की ओर से जहीर खान (15) ने सर्वाधिक विकेट झटके।भारतीय टीम 2014-15 में चार टेस्ट की सीरीज खेलने एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई। इस बार भी भारत के हाथ निराशा लगी। चार मैचों की इस सीरीज को ऑस्ट्रेलिया ने 2-0 से जीता। ऑस्ट्रेलिया ने एडिलेड में पहला टेस्ट 48 रन से और ब्रिसबेन में दूसरा टेस्ट चार विकेट से जीता। मेलबर्न का तीसरा टेस्ट और सिडनी का चौथा टेस्ट ड्रॉ रहे।इस सीरीज में दोनों टीमों की ओर से दो-दो खिलाडि़यों ने कप्तानी की। ऑस्ट्रेलिया के नियमित कप्तान माइकल क्लार्क थे। लेकिन, दूसरे टेस्ट से पहले क्लार्क चोटिल हो गए और अंतिम तीनों टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की कमान स्टीव स्मिथ ने संभाली। भारत के नियमित कप्तान महेंद्र सिंह धौनी थे। पहले टेस्ट में धौनी चोटिल होने की वजह से नहीं खेले और विराट कोहली को पहली बार टेस्ट में कप्तानी करने का मौका मिला। दूसरे टेस्ट में धौनी की वापसी हुई, लेकिन तीसरा टेस्ट धौनी के करियर का आखिरी टेस्ट साबित हुआ, क्योंकि उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास की घोषणा कर सभी को चौंका दिया। इस तरह चौथे टेस्ट से कोहली भारत के नियमित कप्तान बने।इस दौरे पर पहला टेस्ट चार नवंबर 2014 को ब्रिसबेन में खेला जाना था, लेकिन एक घरेलू मैच में सिर पर गेंद लगने के कारण ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज फिल हृयूज की मौत हो गई। इस वजह से सीरीज के कार्यक्रम में बदलाव किया गया। पहला टेस्ट नौ दिसंबर से एडिलेड में खेला गया और दूसरा टेस्ट 17 दिसंबर से ब्रिसबेन में खेला गया।एडिलेड टेस्ट में दो बल्लेबाजों ने दोनों पारियों में शतक जड़े। ऑस्ट्रेलिया की ओर से डेविड वार्नर (145 व 102) और भारत की और से विराट कोहली (115 व 141) ने यह उपलब्धि हासिल की।

यह पूरी तरह से स्मिथ और कोहली की सीरीज साबित हुई। स्मिथ ने चार शतक की मदद से सीरीज में 769 रन बनाए तो कोहली ने भी चार शतक की मदद से 692 रन जड़ डाले। मुरली विजय (482), वार्नर (427) और क्रिस रोजर्स (417) भी 400 से ज्यादा रन बनाने में सफल रहे, जबकि अजिंक्य रहाणे (399) एक रन से चूक गए। गेंदबाजी में 23 विकेट लेने वाले नाथन लियोन के आसपास भी कोई गेंदबाज नजर नहीं आया, जबकि उनके बाद सबसे ज्यादा विकेट मुहम्मद शमी (15) ने झटके।