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दुश्मन के रडार को चकमा दे सकेगी भारतीय सेना, IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने विकसित की तकनीक

The project was supported by DRDO, department of science and technology, and IIT-K.(Picture for repr

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-कानपुर (आईआईटी-कानपुर) के वैज्ञानिकों ने सोमवार को कहा कि उन्होंने कपड़ा आधारित मेटामटेरियल्स विकसित किए हैं जो भारतीय सेनिकोें  और उनके वाहनों को दुश्मन के रडार से चकमा देने मदद कर सकते हैं। यह प्रोजेक्ट डीआरडीओ और आईआईटी कानपुर द्वारा समर्थित था। प्रोजेक्ट का नेतृत्व आईआईटी कानपुर के इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग विभाग के कुमार वैभव श्रीवास्तव और संस्थान के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के जे रामकुमार ने किया।

वैज्ञानिको ने बताया कि इस कपड़ा आधारित मेटामटेरियल्स का उपयोग सेनिकों की यूनिफॉर्म और वाहनों के कवर करने के लिए किया जा सकता है। इसकी मदद से दुशमन के उन्नत युद्धक्षेत्र रडार, मोशन-डिटेक्टिंग ग्राउंड सेंसर और थर्मल इमेजिंग सिस्टम को भी चकमा दिया जा सकता है।

आईआईटी कानपुर के भौतिकी विभाग के प्रोफेसर एस अनंत रामकृष्ण ने कहा, यह एक बड़ी उपलब्धि है। हमने सूक्ष्म-संरचित इन्फ्रा-रेड मेटामटेरियल्स को उन प्रक्रियाओं के साथ डिजाइन किया है जिन्हें बड़े क्षेत्र की सतहों को कवर करने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए आसानी से तैयार जा सकता है। इस इन्फ्रा-रेड मेटामटेरियल्स को इस तरह तैयार किया गया है कि थर्मल उत्सर्जन को कम किया जा सके, जिससे ये थर्मल सेंसिंग के पकड़ में नहीं आता। इन पारदर्शी मेटा-सामग्री अवशोषक को वाहनों की विंडशील्ड और हेलीकॉप्टर को कवर करने के लिए भी विकसित किया गया है।