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जब भारतीय फौज ने संभाला मोर्चा तो पाकिस्तान के हो गए थे दो टुकड़े : India-Pak 1971 War

India-Pak 1971 War: जब भारतीय फौज ने संभाला मोर्चा तो पाकिस्तान के हो गए थे दो टुकड़े

47 साल पहले आज के दिन यानी 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्‍तान ने भारत पर हमला कर 1971 के युद्ध की शुरूआत कर दी थी. पाकिस्‍तान ने भले ही इस युद्ध की शुरूआत 3 दिसंबर 1971 को की हो, लेकिन इसकी साजिश पूर्वी पाकिस्‍तान में आजादी के आंदोलन के साथ शुरू हो गई थी. दरअसल, पाकिस्‍तान का मानना था कि भारतीय सेना बांग्‍लादेश की मांग कर रहे पूर्वी पाकिस्‍तान के लोगों की न केवल मदद कर रही है, बल्कि उन्‍हें युद्ध के लिए सैन्‍य प्रशिक्षण भी दे रही है. इसी खुन्‍नस के चलते पाकिस्‍तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारत पर हवाई हमला कर दिया.पाकिस्‍तान ने भारत-पाक युद्ध 1971 को ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ का नाम दिया था. साजिश के तहत 3 दिसंबर 1971 की शाम 5:30 बजे पाकिस्‍तान सरकार ने इस्‍लामाबाद से पाक वायु सेना को हमले के आदेश जारी कर दिए. आदेश मिलते ही पाकिस्‍तान के लड़ाकू विमानों ने पहला हमला 5:45 बजे अमृतसर के एयरबेस पर किया. इसके बाद, शाम 5:50 बजे पठानकोट, श्रीनगर, अवंतीपुर पर हवाई हमला किया गया. इन हमलों के ठीक 3 मिनट बाद शाम 5:53 बजे फरीदकोट पर पाकिस्‍तानी लड़ाकू विमानों ने बम बरसाने शुरू कर दिए. इन हमलों के पाक सेना सिर्फ भारत के पी-35 राडार को नष्‍ट करने में सफल हो पाई.3 दिसंबर 1971 की शाम भारत की तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं. उनका संबोधन अभी जारी ही था, तभी कुछ अधिकारी तेजी से दौड़ते हुए इंदिरा गांधी के पास पहुंचे. कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले अधिकारियों ने एक पर्ची इंदिरा गांधी को धमाई और कान में कुछ बुदबुदाने लगे. अधिकारियों के हर वाक्‍य के साथ इंदिरा गांधी के चेहरे पर तनाव बढ़ता जा रहा है. दरअसल, इन अधिकारियों ने इंदिरा गांधी को पाकिस्‍तान द्वारा शुरू किए गए हवाई हमलों के बाबत जानकारी दी थी. इंदिरा गांधी ने जनसभा को बीच में छोड़कर दिल्‍ली वापस जाने का फैसला किया.

सैन्‍य अधिकारियों से हालात के बाबत प्रारंभिक जानकारी लेने के बाद इंदिरा गांधी अपने विशेष विमान में दिल्‍ली के लिए रवाना हो गईं. जब-तब उनका विमान दिल्‍ली पहुंचता, तब-तक दिल्‍ली में पूरी तरह से ब्‍लैक आउट लागू हो चुका था. हिलाजा, इंदिरा गांधी का विमान दिल्‍ली में लैंड नहीं हो सका, उनके विमान को लखनऊ के लिए डाइवर्ट कर दिया गया. किसी तरह रात्रि करीब 11 बजे इंदिरा दिल्‍ली पहुंची. दिल्‍ली पहुंचते ही उन्‍होंने सैन्‍य अधिकारियों से तात्‍कालिक स्थिति का जायजा लिया और कैबिनेट की बैठक की. जिसके बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के जरिए देश के नाम अपना संदेश जारी कर पाकिस्‍तान के साथ युद्ध का ऐलान कर दिया.

अब तक पाकिस्‍तान को जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से अपनी कमर कस चुकी थी. रात्रि 9 बजे भारतीय सेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्‍तान की तरफ रुख किया. भारतीय सेना ने देखते ही देखते पाकिस्‍तान के 7 एयरबेस को पूरी तरह से तबाह कर दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के जिन एयरबेस को तबाह किया, उनमें मुरीद, मिंयावाली, सरगोथा, चांदेर, त्रिसालेवाला, रफीकी और मसरुर एयरबेस शामिल हैं. पाकिस्‍तान को तनिक भी अंदाजा नहीं था कि भारतीय वायु सेना इतने कम समय में इतनी सटीक कार्रवाई कर सकती है. भारतीय वायु सेना ने अपनी इस कार्रवाई में पाकिस्‍तान के एयरबेस तो तबाह हुए ही थे, साथ ही दुश्‍मन सेना के मनोबल पर भी बड़ी चोट की गई थी.भारतीय सेना की इस अप्रत्‍याशित और अचूक कार्रवाई से पाकिस्‍तान बुरी तरह से झल्‍ला चुका था. पाकिस्‍तान ने आनन-फानन दूसरे हमले की साजिश रची. साजिश के तहत पाकिस्‍तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने अंबाला, आगरा, हरवाला, अमृतसर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर और उत्तरलाई पर बम बरसाने शुरू कर दिए. हालांकि भारतीय वायुसेना के युद्धकौशल और जांबाजी का नतीजा था कि पाकिस्‍तानी वायु सेना उनके साथ ज्‍यादा देर तक टिक नहीं सकी. इसी का नतीजा था कि भारतीय सेना ने इस युद्ध में पाकिस्‍तान के कुल 94 विमानों को मार गिराया था. इतना ही नहीं, भारतीय वायु सेना की जबरदस्‍त कार्रवाई के चलते पाकिस्‍तानी सेना अपने एक भी षड्यंत्र को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी.

भारतीय नौसेना की पश्चिमी कमान ने 4-5 दिसंबर 1971 की रात्रि कराची बंदरगाह पर हमला बोल दिया. इस हमले में पाकिस्‍तान नौसेना का पीएनएस खायबर और पीएनएस मुहाफिज को जलमग्‍न कर पीएनएस शाहजहां को बुरी तरह से क्षतिग्रस्‍त कर दिया. इसी बीच, 4 दिसंबर को आईएनएस विक्रांत में तैनात सी-हॉक लड़ाकू विमानों ने चटगांव एवं कॉक्स बाज़ार सहित पूर्वी पाक के कई तटवर्त्ती नगरों व कस्बों पर हमला बोल दिया. इस हमले से झल्‍लाए पाकिस्‍तान ने बदला लेने के लिए पीएनएस ग़ाज़ी को भेजा. जिसे विशाखापट्टनम के निकट भारतीय नौसेना ने नेस्‍तेनाबूत कर दिया.भारतीय और पाकिस्‍तान के बीच यह युद्ध महज 13 दिन तक ही चल सका. 13 दिन पाकिस्‍तान की पूरी सेना ने भारत के सामने घुटने टेक दिया. 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाज़ी ने अपने 93 हजार पाक सैनिकों के साथ भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने समर्पण कर दिया.