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लखनऊ में आयोजित राजा भैया की रैली में हो सकता है ‘जनसत्ता’ पार्टी का ऐलान?

यूपी के प्रतापगढ़ स्थित कुंडा से निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की रैली का आयोजन लखनऊ में किया गया है। शुक्रवार यानि 30 नवंबर को होने वाली यह रैली रमाबाई मैदान में आयोजित की गई है। राजा भैया के राजनीतिक करियर के 25 साल पूरे होने के मौके पर इस रैली आयोजन किया गया है। इसके लिए बड़ी संख्या में लोगों का जुटना शुरू हो गया है। राजा भैया की पार्टी के झंडे और बैनर लगे दो पहिया से लेकर चार पहिया वाहन राजधानी की सड़कों पर नजर आ रहे हैं। इस रैली में वे अपनी पार्टी ‘जनसत्ता’ का औपचारिक ऐलान भी कर सकते हैं।

रैली के लिए खास ट्रेन

बता दें कि राजा भैया कि रैली के लिए प्रतापगढ़ के लोगों ने एक खास ट्रेन बुक कराई थी। ये ट्रेन शुक्रवार की सुबह ही लखनऊ आ गई। इस ट्रेन में सवार होकर भारी संख्या में समर्थक रमाबाई मैदान में एकत्र हो चुके हैं। वहीं इस रैली में राजा भैया की रैली के लिए समर्थकों ने खास टी शर्ट छपवाई है। इस टी शर्ट में राजा भैया की तस्वीर लगी हुई है। समर्थक इस टी शर्ट को पहन कर रैली में शामिल होंगे। राजा भैया की रैली से कई दिन पहले ही राजधानी लखनऊ की सड़कें राजा भैया के बैनर और होर्डिंग से पट गए हैं।

जनसत्ता पार्टी का कर सकते हैं ऐलान

राजा भैया 30 नवंबर को राजनीतिक दल का ऐलान कर सकते हैं। दरअसल 30 नवंबर को उनके राजनीति 25 साल पूरे हो रहे हैं, सियासी पारी की सिल्वर जुबली के मौके पर वो नई पार्टी का ऐलान करेंगे। इस बीच खबर है कि राजा भैया के झंडे का रंग पीले और हरे रंग का हो सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग में अपनी पार्टी का नाम जनसत्ता दल रखने और पार्टी के झंडे के रंग को लेकर आवेदन किया था। हालांकि अभी चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और पार्टी के झंडे को मंजूरी नहीं दी है। देखना होगा कि आखिर उनकी पार्टी का क्या नाम होता है और 2019 के चुनाव में इसका प्रदर्शन कैसा रहेगा?

पार्टी बनाने के पीछे ये है मुख्य वजह

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की नई पार्टी बनाने के पीछे मुख्य वजह ये है कि कुछ समय पहले ही संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव में उम्मीद की जा रही थी कि राजा भैया अपने सहयोगी विधायकों के साथ एसपी-बीएसपी के उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया और बीजेपी समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में वोट किया। उनके इस कदम की वजह से अखिलेश यादव से उनकी तल्खी बढ़ गई। वहीं जिस योजना के तहत उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया, उसमें भी उन्हें खास तरजीह नहीं मिली। ऐसा हालात में अब उन्होंने दलीय राजनीति में उतरने और अपनी पार्टी बनाने का मन बना लिया।