खेल देश होम

‘मिताली के साथ नहीं बनती है मेरी’ : रमेश पोवार

भारतीय महिला टीम के कोच रमेश पोवार ने माना, 'मिताली के साथ नहीं बनती है मेरी'

भारतीय महिला वनडे टीम की कप्तान मिताली राज ने कोच रमेश पोवार पर कई तरह के आरोप लगाकर उन पर करियर बर्बाद करना का आरोप लगाया। टी-20 वर्ल्डकप के सेमीफाइनल में मिताली को बाहर करने के बाद से कोच रमेश पोवार फैंस के निशाने पर थे लेकिन अब भारतीय महिला हॉकी टीम के कोच रमेश पोवार ने मिताली के आरोप के बाद सफाई दी है।

पोवार ने कहा कि मैं मानते हूं कि मिताली के साथ मेरे रिश्ते तनावपूर्ण है लेकिन सेमीफाइनल में उनको ना खिलाने का फैसला उन्होंने इस आधार पर नहीं किया था।

रमेश ने स्वीकार किया कि मिताली के साथ उनके पेशेवर रिश्ते तनावपूर्ण हैं, क्योंकि उन्हें हमेशा लगा कि वह अलग-थलग रहने वाली खिलाड़ी हैं और उन्हें संभालना मुश्किल है, लेकिन टीम से बाहर करने का फैसला केवल क्रिकेट के आधार पर था ना कि व्यक्तिगत तौर पर।

पोवार ने कहा मिताली को बाहर करना टीम की रणनीति थी। रमेश ने मिताली के स्ट्राइक रेट के बारे में बोलते कहा कि उनकी खराब स्ट्राइक रेट भी उन्हें बाहर करने का कारण था। इसके बाद हम पिछले मैच में जीत दर्ज करने वाली टीम के साथ ही खेलना चाहते थे।

पोवार से पूछा गया कि आयरलैंड और पाकिस्तान के खिलाफ मैचों में मिताली का स्ट्राइक रेट आड़े क्यों नहीं आया, तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया। आपको बता दें कि मिताली ने इन दोनों मैचों में अर्धशतक जमाए और उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया था।

इसके अलावा बीसीसीआइ की कोच से इस पर भी चर्चा हुई कि क्या मिताली को बाहर करने के लिए किसी प्रभावशाली अधिकारी का बाहरी दबाव था। सूत्रों ने बताया कि पोवार ने किसी का फोन आने का खंडन किया, लेकिन दावा किया कि वह इससे अवगत थे कि ‘बीसीसीआई का प्रभावशाली व्यक्ति’ टीम मैनेजर (तृप्ति भट्टाचार्य) और दौरे की चयनकर्ता (सुधा शाह) के संपर्क में था।भारत के लिए 10 टेस्ट और 197 वनडे मैच खेल चुकीं मिताली ने लिखा कि जब हम वेस्टइंडीज पहुंचे तब ही से सब कुछ शुरू हुआ। पहले कुछ इशारे मिले थे कि कोच पोवार का मेरे साथ व्यवहार ठीक नहीं है लेकिन मैंने इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। ऐसी कई घटनाएं हुईं जब इस पूर्व क्रिकेटर ने मुझे अपमानित महसूस कराया। यदि मैं कहीं आसपास बैठी होती थी तो वह निकल जाते थे या दूसरों को नेट पर बल्लेबाजी करते समय देखते थे लेकिन मैं बल्लेबाजी कर रही होती थी तो वहां नहीं रुकते थे।मैं उनसे बात करने जाती तो फोन देखने लगते या चले जाते। यह काफी अपमानजनक था और सभी को दिख रहा था कि मुझे अपमानित किया जा रहा है। इसके बावजूद मैंने अपना आपा नहीं खोया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मुकाबले से पहले रमेश ने मुझे फोन पर बताया कि मुझे मैदान में नहीं आना है क्योंकि वहां मीडिया होगी। इस बात से मैं चौंक गई थी। यह चिंता और अपमान की बात इसलिए थी क्योंकि कोच मुझे बर्बाद और अपमानित करने पर तुले हुए थे।