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मुंबई हमले पर बढ़ सकती हैं पाक की मुश्किल

मुंबई हमले पर बढ़ सकती हैं पाक की मुश्किल, अमेरिका और भारत ने दिखाए तल्ख तेवर

मुंबई हमले के दोषियों को अभी तक बचाने वाले पाकिस्तान की मुश्किलें आने वाले दिनों में बढ़ सकती है। 26 नवंबर, 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले की 10वीं वर्षगांठ पर भारत और अमेरिका ने जिस तरह से एक स्वर में पाकिस्तान के स्तर पर दोषियों को सजा देने में की जाने वाली आनाकानी पर आपत्ति जताई है वह दरअसल इन दोनो देशों के बीच एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

भारत व अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वे लश्करे-तैयबा व इसके जैसे दूसरे आतंकी संगठनों पर लगाम लगाने में असफल रहे पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र के जरिए नकेल कसने का कदम उठा सकते हैं। इस बारे में दोनो देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के बीच इस बारे में लगातार विमर्श का दौर चल रहा है।

सोमवार को अमेरिका के विदेश सचिव माइकल पोम्पिओ ने ट्विट कर मुंबई हमले के दोषियों को अभी तक सजा नहीं मिलने पर पाकिस्तान की मंशा पर सीधे तौर पर सवाल उठा दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका मुंबई हमले में मारे गये छह अमेरिकी नागरिकों समेत अन्य मृतकों के परिवारों के प्रति अपनी संवेदना जताता है। दस वर्ष बाद भी जिन लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया था उन्हें सजा नहीं मिल पाई है।

उन्होंने इस घटना के साजिशकर्ता लश्करे-तैयबा समेत अन्य आतंकी संगठनों पर संयुक्त राष्ट्र की तरफ से जारी आदेश के तहत लगाम लगाने में असफल रहे सभी देशों, खास तौर पर पाकिस्तान का नाम ले कर कहा है कि वह उपयुक्त कदम उठायें। इसके साथ ही विदेश सचिव पोम्पिओ ने मुंबई हमले की साजिश रचने वाले या उसे अंजाम देने वालों के बारे में अतिरिक्त सूचना देने या उन्हें गिरफ्तार करवाने वालों को 50 लाख डॉलर की राशि के ईनाम की घोषणा की है।

मुंबई हमले की बरसी पर पहली बार अमेरिका की तरफ से इतने सख्त शब्दों और खास तौर पर पाकिस्तान का नाम लेते हुए इस तरह के बयान जारी किये गये हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिका दोषियों को सजा दिलाने के लिए वचनबद्ध है।

भारत के विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पोम्पिओ के इस बयान का स्वागत किया है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान से दोषियों को सजा दिलाने की मांग की है। स्वराज ने अपनी तरफ से भी पाकिस्तान से कहा है कि, ‘वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मंशा को ध्यान में रखते हुए इस दुखद आतंकी घटना के दोषियों के खिलाफ कदम उठाये।’

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में बाद में पाकिस्तान को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ा गया। इसमें कहा गया है कि मुंबई हमले की साजिश से लेकर इसे अंजाम देने तक का काम पाकिस्तान की जमीन से किया गया। हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री तक ने यह स्वीकार किया है कि हमलावरों को पाकिस्तान से भेजा गया था।

सुषमा स्वराज ने कहा कि हम पाकिस्तान से आग्रह करते हैं कि वे नीतियों में दोहराव को छोड़े और दोषियों को कानूनी सजा दिलाने की व्यवस्था करें। यह पाकिस्तान का सिर्फ इसलिए दायित्व नहीं है कि हमले में मारे गये लोगों को न्याय दिलाना है बल्कि यह उसकी अंतरराष्ट्रीय दायित्व भी है। भारत इसके लिए आगे हमेशा कोशिश करता रहेगा।

दरअसल, विदेश मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ताओं में मुंबई हमले के दोषियों को सजा दिलाना हमेशा एक अहम मुद्दा रहा है। खास तौर पर दोनो देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के पिछले दिनों हुई बैठक में यह मुद्दा खास तौर पर उठा। दोनो देश पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ाएंगे।सोमवार को दोनो देशों के विदेश मंत्रियों की तरफ से एक साथ एक जैसे बयान देने का भी मतलब यही है। भारत ने मुंबई हमले की 10वीं बरसी पर उन सभी देशो में श्रद्धांजलि सभा आयोजित की है जिनके निवासी इस हमले में मारे गये थे। ऐसी सभा 14 देशों में भारतीय मिशनों ने आयोजित की है। इस हमले में भारत समेत 15 देशों के 166 लोगों की मौत हुई थी। इसकी साजिश रचने वाले पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं।