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मिताली ने कहा- कोच ने मुझे अपमानित किया, कुछ लोग मुझे बर्बाद कर देना चाहते हैं

Mithali Raj said coach Ramesh Powar insulted me during T20 World Cup

भारतीय महिला क्रिकेट में शुरू हुई कॉन्ट्रोवर्सी मंगलवार को तब और बढ़ गई जब पूर्व कप्तान मिताली राज का बीसीसीआई को लिखा एक पत्र सामने आया। पत्र में मिताली ने कोच रमेश पोवार पर उन्हें अपमानित करने का आरोप लगाया और प्रशासकों की समिति (सीओए) की सदस्य डायना एडुल्जी को पक्षपाती करार दिया। मिताली भारतीय महिला टीम की सबसे कामयाब बल्लेबाज हैं।उन्हें हाल ही में खत्म हुए टी-20 वर्ल्ड कप में इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में मौका नहीं दिया गया था, जबकि उन्होंने टूर्नामेंट में दो अर्द्धशतक लगाए थे। भारत यह मैच 8 विकेट से हार गया था। तभी से टीम में विवाद है। मिताली का कहना है कि सत्ता में बैठे कुछ लोग उनका करियर तबाह करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग अपने पद का मेरे खिलाफ गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस बीच, पोवार ने मिताली के आरोपों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, एडुल्जी से संपर्क नहीं हो पाया।मिताली ने इस संबंध में बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी और महाप्रबंधक (क्रिकेट ऑपरेशंस) सबा करीम को एक पत्र लिखा। इसमें उन्होंने कहा है, ‘20 साल के करियर में मैं पहली बार खुद को अपमानित, हतोत्साहित, निराश महसूस कर रही हूं। मैं यह सोचने पर मजबूर हूं कि जो लोग मेरा करियर तबाह करना चाहते हैं और मेरा आत्मविश्वास तोड़ना चाहते हैं, उनके लिए देश को दी जाने वाली मेरी सेवाओं की कोई अहमियत नहीं है।’मिताली ने पत्र में ऐसी कई घटनाओं का जिक्र किया, जिनमें कोच पोवार के कारण उन्होंने खुद को अपमानित महसूस किया। मिताली ने लिखा, ‘उदाहरण के लिए, मैं जहां भी कहीं बैठती थी, वे उठकर चले जाते थे, नेट्स पर जब दूसरी बल्लेबाज अभ्यास कर रही होती थीं तो वे मौजूद रहते थे, लेकिन जैसे ही मैं बल्लेबाजी के लिए जाती, वे वहां से चले जाते थे। यदि मैं उनसे बात करने की कोशिश करती तो वे अपने फोन में कुछ देखने लगते और वहां से निकल जाते। यह किसी के लिए भी शर्मनाक था। यह बिल्कुल स्पष्ट था कि मुझे अपमानित किया जा रहा था। इसके बावजूद मैंने कभी भी अपना धैर्य नहीं खोया।’ उन्होंने लिखा, ‘मैं यह भी बताना चाहती हूं कि मैं टी-20 की कप्तान हरमनप्रीत के बिल्कुल भी खिलाफ नहीं हूं, सिवाय इसके छोड़कर कि उन्होंने आखिरी-11 से मुझे बाहर रखने के कोच के फैसला का समर्थन किया। वह फैसला समझ से परे और टीम के लिए हानिकारक साबित हुआ। मैं अपने देश के लिए वर्ल्ड कप जीतना चाहती हूं। कोच के फैसले से मैं दुखी हूं कि हमने एक सुनहरा मौका गंवा दिया।’मिताली ने पत्र में डायना एडुल्जी को भी पक्षपाती बताया। एडुल्जी ने मिताली के नहीं चुने जाने के फैसले का बचाव किया था। एडुल्जी ने कहा था कि  मिताली को बाहर रखने के फैसले पर सवाल नहीं उठाए जा सकते। वह दिन ही भारतीय टीम के लिए खराब था। एडुल्जी महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रह चुकी हैं। मिताली ने लिखा, ‘मैंने डायना एडुल्जी में हमेशा विश्वास जाहिर किया है। सीओए की सदस्य के तौर पर मैंने हमेशा उनकी इज्जत की है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वे मेरे खिलाफ अपने पद का इस्तेमाल करेंगी। वह भी यह सुनने के बाद कि वेस्टइंडीज में मुझे क्या करना है, क्योंकि इस संबंध में मैंने उनसे चर्चा की थी। लेकिन उन्होंने मीडिया में टी-20 विश्व कप के सेमीफाइनल में मुझे बेंच पर बैठाने के फैसले का जोरदार समर्थन किया। इस बात ने मुझे बहुत परेशान किया, क्योंकि मैंने उन्हें वास्तविक तथ्यों से अवगत कराया था।’