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मध्य प्रदेश: कांग्रेस की विज्ञापन एजेंसी ने पार्टी को लगाया करोड़ों का चूना

एक तरफ कांग्रेस आपसी खींचातानी से जूझते हुए मध्य प्रदेश में अपनी सत्ता वापसी के लिए पूरा जोर लगाए है, वहीं दूसरी ओर वहां प्रदेश की प्रचार एजेंसी में कामकाज में ऐसी गड़बड़ी सामने आई कि हाइकमान को ऐन चुनावों के बीच उस एजेंसी का काम न सिर्फ दूसरे को देने का फैसला करना पड़ा बल्कि इस पूरे मामले की जांच कराने का फैसला भी किया गया है। बता दें कि प्रदेश में कांग्रेस के प्रचार का ठेका गुजरात की कंपनी निक्सन लिमिटेड को दिया गया था।

निक्सन लिमिटेड को अखबारों, एफएम रेडियो और न्यूज चैनलों में विज्ञापन देने के साथ-साथ राज्यभर में होर्डिंग्स लगाने और विज्ञापन तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था। बताया जाता है कि एजेंसी ने पूरे प्रदेशभर में कांग्रेस के होर्डिंग लगाने की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन असल में उसने सिर्फ बड़े-बड़े शहरों या प्रमुख इलाकों में ही होर्डिंग लगाए। ताकि बडे़ नेताओं की नजरें उन पर पड़ सकें। जबकि बिल सबके लिए भेजा गया। निक्सन वही एजेंसी है, जिसने गुजरात चुनाव में कांग्रेस के लिए ‘विकास पागल हुआ’ जैसी सुपरहिट टैगलाइन तैयार की थी। गुजरात में इसकी परफॉर्मेंस को देखते हुए मध्य प्रदेश में इस एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इतना ही नहीं, कंपनी को बाकायदा इसके लिए 100 करोड़ का ठेका भी दिया गया था।

बताया जाता है कि पूरे मामले में गड़बड़ी की बात तब सामने आई, जब एजेंसी ने प्रिंट मीडिया में विज्ञापन देने के लिए पार्टी से और पैसे की मांग की। तब पार्टी को लगा कि बजट तय होने के बाद बीच चुनाव में अतिरिक्त बजट क्यों मांगा जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, यह जानकारी सामने आते ही प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ ने सारा मामला दिल्ली भेज दिया। दिल्ली में मामला सामने आने पर हाइकमान ने जहां सबसे पहले प्रचार का काम उस एजेंसी से लेकर दूसरी एजेंसी को देने का फैसला किया, वहीं पूरे मामले की छानबीन कराने का फैसला किया। इसकी जिम्मेदारी पार्टी के कोषाध्यक्ष अहमद पटेल को सौंपी गई। बताया जाता है कि अब यह जिम्मा गोल्डन रैबिट कम्युनिकेशन को सौंपा गया है, जो सीधे पटेल को रिपोर्ट कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, शुरुआती छानबीन में पता चला है कि इसमें लगभग 20 करोड़ रुपये के आसपास घपला हुआ है। पार्टी एजेंसी के साथ-साथ अपने दल के नेताओं से भी पूछताछ कर रही है। खासकर पार्टी पता लगा रही है कि किन नेताओं की सिफारिश व संपर्कों से इस एजेंसी को काम दिया गया। उल्लेखनीय है कि इसमें प्रदेश के एक दिग्गज नेता का नाम सामने आ रहा है, जिसके गुजरात स्थित एक रिश्तेदार के जरिए यह एजेंसी पार्टी के संपर्क में आई। कहा जा रहा है कि नेता के गुजरात स्थित रिश्तेदार से निक्सन लिमिटेड के मालिक के करीबी संबंध हैं। निक्सन ने 2013 में मध्य प्रदेश में भी प्रचार का काम देखा था। तब भी इसके कामकाज और सेवाओं को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठे थे। लेकिन दिग्गज नेता के प्रभाव के चलते सवालों को दबा दिया गया था। 2013 में उन्हीं के कहने पर इस एजेंसी को ठेका दिया गया था। मध्य प्रदेश का मामला सामने आने के बाद अब हाइकमान ने दूसरे राज्यों में विज्ञापन का काम देख रही एजेंसी और गतिविधियों पर ऐहतियातन नजर रखना शुरू कर दिया है।