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बंद हुए बद्रीनाथ धाम के कपाट

देवभूमि के चारों धामों में प्रमुख भगवान बद्रीविशाल जी के मंदिर के कपाट मंगलवार शीतकाल के लिए बंद हो गए. पंच पूजाओं के साथ शुरु हुई कपाट बंद होने की प्रक्रिया के आखिरी दिन आज प्रातः से ही भगवान नारायण की विशेष पूजा-अर्चना की गई. इसके बाद मुख्य पुजारी रावल जी द्वारा भगवान बद्री विशाल जी के कपाट बंद किए गए. बद्रीपुरी को बैकुंठ धाम, मोक्ष धाम भी कहते हैं. नर नारायण पर्वत के मध्य भैरवी चक्र पर भगवान बद्री नारायण का यह मंदिर है.

बद्रीनाथ जी के मंदिर के कपाट वैदिक मंत्रों के साथ बंद कर दिए गए, सुबह से ही जहां विशेष पूजा और मंत्रोचार के साथ भगवान का अभिषेक व किया गया वहीं बाद में रावल जी द्वारा स्त्री रूप धारण कर मां लक्ष्मी जी को नारायण के अंक में स्थापित किया गया. इसके बाद ठीक 3 बजकर 21 मिनट पर बद्रीनाथ के कपाट इस वर्ष शीतकाल के लिए बंद हो गए.

कपाट बंद होने के मौके पर जहां देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान बद्री विशाल के दर्शनों के लिए पहुंचे तो वहीं विदेशी सैलानी भी दर्शनार्थियों के रूप में बद्री धाम पहुंचें. श्रद्धालुओं में भगवान नारायण के दर्शन का उत्साह देखते ही बन रहा था. सब की आंखें थोड़ी नम थीं कि कुछ दिनों प्रभु के दर्शन नहीं हो पाएंगे.