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2 मुख्यमंत्रियों के खिलाफ भाजपा के ही 2 पूर्व दिग्गजों के रिश्तेदारों को उतारा

मानवेंद्र झालारपाटन से सीएम व�

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हो रहे विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस जीत के लिए कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहती। इसके लिए राहुल गांधी और उनके सलाहकार प्रत्याशियों के चयन में भी बहुत समझदारी या कहें चालाकी से काम कर रही है। चुनाव होता है तो बागियों की परेशानी बड़े दलों को परेशान करती है। जिनको टिकट नहीं मिलता वो पार्टी के लिए परेशानी का सबब भी बन जाते हैं। कांग्रेस इस बार प्रत्याशियों के चयन में कुछ ऐसा दांव चल रही है कि इसकी वजह से भाजपा को भी परेशानी हो सकती है। यहां दो ऐसे ही उदाहरण आपको दे रहे हैं। इनकी वजह से मुकाबला रोचक ही नहीं बहुत कांटे का भी हो सकता है।छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह लंबे वक्त से सत्ता पर काबिज हैं। यहां भाजपा को एंटी इंकमबेंसी का डर भी सता रहा है। पहले दौर का चुनाव हो चुका है और दूसरा दौर 20 नवंबर को है। पहले दौर में जिन सीटों पर चुनाव हुआ उनमें छत्तीसगढ़ के सीएम रमन सिंह की सीट राजनांदगांव भी थी। यह मुकाबला रोचक रहा। हालांकि, जीतेगा कौन? ये तो परिणाम आने पर ही पता लगेगा। कांग्रेस ने यहां से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी करुणा शुक्ला को उतारा था। वो 32 साल तक भाजपा में रहीं लेकिन रमन सिंह से उनके संबंध अच्छे नहीं रहे। यही वजह है कि कांग्रेस ने सीधे रमन सिंह के खिलाफ ही उन्हें उतार दिया।राजस्थान का चुनाव काफी दिलचस्प है। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला है। जसवंत सिंह भाजपा के दिग्गज नेताओं में से एक हैं। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वो विदेश और वित्त मंत्री भी रहे। उनके पुत्र मानवेंद्र सिंह का भाजपा से मोहभंग हो गया तो वो पार्टी छोड़कर कांग्रेस में चले गए। अब मानवेंद्र झालारपाटन से सीएम वसुंधरा को चुनौती देने के लिए मैदान में उतर चुके हैं। शनिवार को उन्होंने कहा- मुझे इस बात की खुशी है कि राहुल गांधी ने मुझे इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी। मैं चुनाव प्रचार साफ सुथरे तरीके से करूंगा।