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500 करोड़ से ऊपर की योजनाओं में देरी पर सीएम सख्त

बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के साथ ही ‘शोकेस’ किए जा सकने वाले बड़े प्रॉजेक्ट भी जल्द जमीन पर उतरें इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागों के पेच कसने शुरू कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने 500 करोड़ से अधिक के प्रॉजेक्ट को तय डेटलाइन पर पूरा करने को कहा है। देरी के चलते जिन प्रॉजेक्ट की लागत बढ़ी हैं, सीएम योगी ने उनकी समीक्षा कर जिम्मेदारी की जवाबदेही भी तय करने को कहा है।

प्रदेश में इस समय विभिन्न विभागों की 49 परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं, जिनकी लागत 500 करोड़ से अधिक हैं। इसमें ऊर्जा विभाग की 12, अवस्थापना और औद्योगिक विकास की 6, सिंचाई विभाग की 10, आवास और शहरी नियोजन की 3, नगर विकास विभाग की 6, चिकित्सा शिक्षा की 6, लोक निर्माण विभाग की 4, गृह और दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की एक-एक योजनाएं हैं। इसमें ज्यादातर योजनाएं ऐसी हैं, जिनकी अखिलेश सरकार में नींव तो पड़ गई थी लेकिन या तो उनमें काम आगे नहीं बढ़ा या उनमें देरी के चलते लागत लगातार बढ़ती रही। बिजली विभाग की कुछ योजनाएं तो मायावती के समय से लटकी पड़ी हैं। पिछले दिनों सीएम ने इन सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट तलब की थी। कई योजनाओं की उन्होंने डेटलाइन घटा दी है तो कुछ में ज्यादा लागत बढ़ाए जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए जांच के भी आदेश दिए हैं।

500 करोड़ से अधिक की 90% योजनाएं तय टाइमलाइन से डेढ़ साल से लेकर 10 साल तक टाइम ओवररन हैं। इनके चलते इनकी लागत डेढ़ से दो गुना तक बढ़ गई है। खासकर बिजली विभाग की अधिकांश योजनाओं में देरी के चलते लागत में काफी बढ़ोतरी हुई। इस तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत बन रहे मेडिकल कॉलेजों की भी मूल लागत योजना में लगातार देरी के चलते दोगुनी तक बढ़ चुकी है। अधिकारियों ने सीएम को सफाई में बताया कि योजना में निर्माण कार्य के लिए समय से पैसा नहीं मिला जिसके चलते देरी हुई और लागत बढ़ती गई। सीएम ने मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी परियोजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए खास तौर पर एक कमिटी बनाने को कहा है जिससे इनका सुचारू संचालन करा समय से योजनाओं को पूरा किया जा सके। सीएम ने इस पर भी नाराजगी जाहिर की है कि कुछ मेडिकल कॉलेजों में एक साथ सारे काम शुरू करा दिए गए जिससे कोई भी काम पूरा नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि जहां 10% से कम काम हुए हैं उन्हें रोककर बाकी काम पूरा किया जाए।