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मुलायम के परि’वार’ का कुरुक्षेत्र बनेगा फिरोजाबाद!

2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों ने अपने तरकश में तीर जुटाने शुरू कर दिए हैं। इस बीच सबकी नजर यूपी के सबसे बड़े सियासी कुनबे में चल रहे परि’वार’ पर है। अखिलेश यादव से अलग राह बना बना चुके शिवपाल यादव ने फिरोजाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ने की संभावनाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है। ऐसे में यह सीट मुलायम परिवार का ‘कुरुक्षेत्र’ साबित हो सकती है। यहां से मुलायम के चचेरे भाई और सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय यादव मौजूदा सांसद हैं। आधिकारिक तौर पर अब भी सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने चाचा शिवपाल यादव को सपा से रुखसत करने पर मुहर नहीं लगाई है। हालांकि, शिवपाल यादव अपनी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी बनाकर अपने अलग रास्ते का ऐलान कर चुके हैं। उन्होंने प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों पर अपनी पार्टी के उम्मीदवारी का दावा भी कर दिया है। हालांकि, मैनपुरी सीट पर शिवपाल की पार्टी की दावेदारी मुलायम सिंह यादव के रुख पर निर्भर करेगी। शिवपाल उन्हें अपने टिकट पर लड़ने और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद सौंपने का प्रस्ताव दे चुके हैं। इन कवायद के बीच अहम यह है कि शिवपाल यादव अपने लिए लोकसभा की कौन सी सीट चुनते हैं? शिवपाल ने फिरोजाबाद पर नजरें गड़ा दी हैं। सूत्रों की मानें तो शिवपाल खेमा फिरोजाबाद को जातीय व सामाजिक समीकरण के साथ ही मुलायम कुनबे के अंदरूनी हालात की वजह से भी मुफीद मान रहा है। 1999 से फिरोजाबाद पर सपा का ही कब्जा (2009 के उपचुनाव को छोड़कर) रहा है। 2009 में अखिलेश यादव यहां से लोकसभा चुनाव जीते थे। हालांकि, उन्होंने यह सीट अपनी पत्नी डिंपल यादव के लिए छोड़ दी थी। उपचुनाव में डिंपल यह सीट नहीं बचा पाई और सपाई से कांग्रेसी हुए राजबब्बर से चुनाव हार गईं। 2014 में रामगोपाल यादव के बेटे अक्षय प्रताप यादव मोदी लहर में भी इस सीट से एक लाख से अधिक वोटों से चुनाव जीते। सूत्रों की मानें तो शिवपाल खेमे का मानना है कि डिंपल यादव की इस सीट से हार से साफ है कि फिरोजाबाद की यादव बेल्ट किसी ‘बाहरी’ को स्वीकार नहीं करती। इस मायने में शिवपाल यादव उनके सर्वाधिक ‘अपने’ हैं। पिछले महीने रोड शो की भीड़ ने इस धारणा को और मजबूत किया है।

डिंपल की हार के बाद अखिलेश यादव की ओर से फिरोजाबाद के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की उपेक्षा के भी चर्चे रहे हैं। अक्षय यादव के मौजूदा सांसद होने के एक स्वाभाविक एंटीइनकंबेंसी भी रहेगी। दूसरे महागठबंधन की चर्चाओं और अखिलेश यादव की अगुआई वाली सपा में अक्षय यादव की दावेदारी बनी रहेगी यह भी अहम सवाल है इसलिए शिवपाल खेमे ने इसे सर्वाधिक सुरक्षित सीट मान तैयारी झोंक दी है। सपा का बेस वोट यादव है और शिवपाल यादव की प्रगतिशाली समाजवादी पार्टी भी इन्हीं वोटरों पर अपनी उम्मीद टिकाए है। मुलायम सिंह यादव दोनों ही खेमें में पांव रखे हैं इसलिए यादव वोटरों में भी एक कन्फ्यूजन की स्थिति है। सूत्रों का कहना है कि फिरोजाबाद सीट का चुनाव मुलायम परिवार में कौन किसके साथ हैं और यादवों की रहनुमाई कौन करेगा इसका भी लिटमेस टेस्ट साबित हो सकती है। वजह यह है कि मुलायम परिवार की अधिकतर रिश्तेदारियां भी इसी जिले में है।